वयस्क मताधिकार के द्वारा जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है | लोकसभा , विधानसभा तथा स्थानीय स्तर कें लिए समान्यतः प्रत्येक 5 वर्ष में चुनाव होते हैं | चुनाव करने का जिम्मेवारी निर्वाचन आयोग को सौपी गयी है | स्थानिक चुनाव कराने का अधिकार राज्य निर्वाचन आयोग को दिया गया है |
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
मूल संविधान में मत देने का अधिकार आयु 21 वर्ष था |
लेकिन संविधान में 61वें संविधान संशोधन के द्वारा 18 वर्ष हो गया है | इसका अर्थ है की 18 वर्ष वर्ष की उम्र का प्रत्येक भारतीय नागरिक को मानस नस्ल, जाति, वर्ग, धर्म, स्थान, या लिंग के भेदभाव के बिना मत देने का अधिकार है।
*18 वर्ष के लोग किस चुनाव में भाग लेते हैं ?
Ans :- लोकसभा प्रत्येक राज का विधानसभा एवं स्थानीय स्वशासन चुनाव में
1. मतदाता सूची में किन के नाम शामिल किए जाते हैं?
मताधिकार प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज होता है।
2. मताधिकार प्राप्त कौन कर सकता है?
Ans :- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 325 या 326 के अनुसार प्रत्येक
1 वयस्क नागरिक पागल या
2 अपराधी ना हो मताधिकार प्राप्त है
3 किसी नागरिक को धर्म जाति वर्ण संप्रदाय अथवा लिंग के कारण मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
3. मतदाता सूची में किसको नाम आता है।
Ans:- 1 जिसका मृत्यु हो जा चुका हो
2 प्रवास कर चुका हो
3 शादी का दूसरे स्थान पर वास हो गया हो
अपना नया पहचान पत्र या गलती किसी प्रकार जैसे नाम जन्म तिथि इत्यादि के लिए लिंक्स पर क्लिक कीजिये
4 मतदाता सूची में समय-समय पर संशोधन क्यों आवश्यक है।
Ans:- 1 मतदाता सूची भूल
2 नया मतदाता सूची बनाना
3 अगर किसी को मतदाता सूची में गलती हो तो सुधारना
4 नए मतदाता सूची बनवाना पुराने को हटाना इसलिए मतदाता सूची संशोधन जरूरी होता है
मतदान केंद्र में पहुंचकर अपना मतदान गुप्त रूप से माध्यम मतपत्र पेट का में होता था, लेकिन अब ईवीएम EVM :- Electronic Voting Machine का प्रयोग कर्म मत लिया जाता है एवं की सर्वप्रथम प्रयोग केरल में नॉर्थ परावुर विधानसभा क्षेत्र के लिए चुनाव में 1988 में किया गया था। आम चुनाव एवं राज्य चुनाव के द्वारा 1999 में किया गया था।
पूरे भारत में आम चुनाव में राज्य के चुनाव में ईवीएम की शुरुआत 2004 में किया गया था।
*ईवीएम (EVM) से क्या फायदे है?
मशीन से भेंट करने में समय बचत होती है
चुनाव के परिणाम घोषित करने में कम समय पर लगता है।
ईवीएम EVM में वोट डालने के तुरंत बाद एक पर्ची देता है इसका नाम VVPT है इस पर्ची में मत देने वाले का नाम चुनाव चिन्ह छाप होता है इसलिए दिया जाता है क्योंकि किसी तरह का विवाद ना हो।
V.V.P.T Full Form
VOTER VERIFY ABLE PAPER AUDIT TRAIL
इसकी सर्वप्रथम शुरुआत नागालैंड 2003 में हुआ था 2019 में लोकसभा चुनाव से पूर्व भारत में उपयोग होने लगा।
निर्वाचन आयोग के कार्य
चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन
2 मतदाता सूची तैयार करना
3 विभिन्न राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करना।
4 राजनीतिक दलों को आरक्षित चुनाव चिन्ह प्रदान करना
5 मतदान से संबंधित तिथियों का निर्धारण
6 चुनाव आचार संहिता
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आपका प्यारा अम्बिका
दिनाँक 26/04/2022

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