राजनितिक भूगोल UG sem 6 G.S & Quiz.

भारत :राजनैतिक परिप्रेक्ष (India: Political Aspect)

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आइडियोलॉजी जो विचार शब्द का अंग्रेजी पर्याय है |  शब्द का प्रयोग पहली बार 23 मई 1797 को एक फ्रेंच सिद्धांतशास्त्री डेस्टट डी  ट्रेसी (Destut di tracy) ने किया| डेस्टट डी  ट्रेसी इंस्टिट्यूट नेशनल का संस्थापक सदस्य था |

 

अर्थ व प्रकृति (Meaning and nature)

राजनितिक भूगोल की अवधारणा क्या है?

भूगोल का यह एक शाखा है जो मनुष्य सरकारें, राजनितिक इकाई की सीमओं और उपखंड और शहरो की स्थिति से सम्बंधित हैं

 

 

विचारधरा का अर्थ व उसकी प्रकृति का विवेचन कीजिये| क्या अब विचारधारा का अंत हो गया है?

विचारधारा  का सामान्य आशय राजनितिक सिद्धांत रूप में किसी समाज या समूह में प्रचलित उन विचार का समुच्चय है जिनके आधार पर वह किसी सामाजिक, आर्थिक और राजनितिक संघटन विशेष को उचित या अनुचित ठहरता है|

विचारधारा के आलोचक बहुदा  इसे एक विश्वास के विषय के रूप में व्यवहार करतें हैं जिसका वैज्ञानिक आधार नहीं होता है|

 

 

मानव भूगोल के तिन उप-विषय  में विभाजित करके अध्ययन किया जाता है|

1 आर्थिक 2 सामजिक 3 राजनैतिक

राजनैतिक भूगोल इस विषय में अध्ययन के लिए निम्न मुद्दों का शामिल किया जाता है जैसे:- भू-राजनैतिक इकाई का आकाशीय संगठन, नये राज्य का गठन, अंतराष्ट्रीय शक्ति सम्बन्ध, राष्ट्रीयता, सीमा एवं सीमांत क्षेत्र, सैन्य संघर्ष, उपराष्ट्रीयता, प्रदेशिकवाद,आतंकवाद इत्यादि

 

विश्व के लोकतंत्र देशों में दो प्रकार की सरकारें होतें हैं |
1 एकात्मक सरकार

2 संघीय सरकार

 

1 एकात्मक प्रणाली (Unitary System)

संघ की सरकार अतिरिक्त स्वास्थ्य सुरक्षा और कल्याण, कर व्यवस्था करती है|इसी राज्यव्यवस्था में स्थानीय स्तर पर कार्य कर रहे निकायों के अधिकार एवं शक्तियों का निर्धारण भी केंद्र सरकार ही करती है|

जैसे :- ग्रेट ब्रिटेन (United Kingdom)

 

 

 

2 संघीय सरकार (Fedral System)

संघीय प्रणाली में सरकारी प्राधिकार विभिन्न स्तरों पर विभाजित होतें हैं ऐसे राज्यव्यवस्था में विभिन्न प्रदेशों एवं लोगो के एक साथ सह-अस्तित्व  में रहने की व्यवस्था और चुनौती होती है| संघीय प्रणाली में न सिर्फ एक से अधिक  स्तरों की सरकारें होती बल्कि इन सरकारों का अधिकार क्षेत्र एवं कार्यों का उनके लिखित संविधान में स्पष्ट वर्णन भी होता है

 

 इसे भी पढ़ें :- वर्ग 6 राजनितिक 

*विश्व का प्रथम तथा सफलतम संघीय राज्य माना जाता है अमेरिका

*विश्व का सबसे वृहत लोकतंत्र भारत एक संसदीय लोकतंत्र (Parliament democracy) और संघीय राज्य माना जाता है

विभिन्न राजनितिक एवं विशेषज्ञों द्वारा भारतीय भारतीय संविधान को कभी एकात्मक, कभी संघीय (Quasi Fedral)  कहा गया है|

भारत के सर्वोच्च न्यायलय द्वारा भारत के संविधान को स्पष्ट रूप से संघीय बताया गया है|

 

 

 

 

भारतीय संघवाद (Indian fedarlism)

भारत राज्यों का संघ है तथा यहाँ संसदीय शासन प्रणाली है| संविधान के उदेशिका के अनुसार भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्र, गणराज्य है| संविधान सभा ने भारत के संविधान को 26 जनवरी  1949 को स्वीकृति दी तथा 26 जनवरी 1950 को संविधान लागु हो गया

भारतीय संसदीय प्रणाली की संरचना संघीय है भारत का राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका का प्रमुख है| अपने निनाय के लिए एक मंत्री परिषद् की सलाहों पर निर्भर रहना अनिवार्य है| वैसे राष्ट्रपति कई स्थितिया मंत्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होता है भारत में संघवाद का उदय भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा केन्द्रीय एवं प्रांतीय परिषद् को कुछ अधिक शक्तियां प्रदान की गयी है

 

भारतीय संघवाद का भौगोलिक आधार

( Geographical bases of Indian Federalism)

भारत के संघवाद व्यवस्था के भौगोलिक आधार को हम कई विन्दुओ द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

1 देश का वृहत आकार

भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है (रूस, कनाडा, चीन, स.रा.अ, ब्राजील एवं ऑस्ट्रेलिया) के बाद भारत आता है

भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32,87,263  वर्ग2

2 स्थलाकृति विविधता

विश्व का सबसे ऊँची चोटी K2 है इसका 8611 मीटर  भारत में है| भारत के सबसे ऊँची और विश्व की ऊँची चोटी के रूप में K2 है भारत का सबसे गहरा भाग 700 मीटर है| भारत के मध्य में विन्ध्य पर्बत श्रेणी है|

 

3 जलवायु में विविधता

भरता एक उष्णकटिबंधिय मानसूनी जलवायु का देश है लेकिन यहाँ तापमान एवं वर्षण में विविधता है| वृहत, आकार, बड़े अक्षांशीय विस्तार, विविध, स्थलाकृति  एवं तिन तरफ से समुद्र से घिरा होना इसकी जलवायु पर अपना परत्यक्ष प्रभाव छोड़ते हैं | भारत में तापमान की भी विविधता है जैसे राजस्थान में 56 डिग्री से ऊपर गर्मी हो जाता है जहाँ सर्दियों में कारगिल में -45 डिग्री निचे चला जाता है इसे भी पढ़ें :- 

B.A Sem 5th political science


 

विश्व में अधिक वर्षा भारत देश के मेघालय राज्य के चेरापूंजी के पास 1150 cm से अधिक वर्षा होती है इससे और बड़ा क्या हो सकता है लेकिन भारत के कई क्षेत्रों में सुखाड़ भी हो जाता है |

भारतीय संघ की संरचना 

(Structure of Indian Federation)

 

भारतीय संविधान में केंद्र सरकार तथा राज्यों के बिच संप्रभुता का वितरण शामिल है| यह शक्ति भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुसार है|

     

केंद्र/ संघ सरकार (Central Government)

97 विषयों पर कानून बनाने का एकमात्र अधिकार केंद्र सरकार को है जिनमे कुछ विषय का नाम निम्न है रक्षा राष्ट्रिय सुरक्षा, विदेशी, मामले, बैंकिंग, मुद्रा, परिवहन तथा संचार वाणिज्य, परमाणु, उर्जा, फौजदारी तथा दीवानी कानून का सामान्य ढांचा, राजस्व एकत्रीकरण, संकट की घडी में राज्य सरकार को भंग करने की क्षमता, नागरिकता, अप्रवास, मौद्रिक निति आदि शामिल है|

 

राज्य सरकार/ राज्य सूची (State List)

राज्य सूची में 66 विषय हैं  जिनमे कृषीय विकास, जल, वन, मत्स्य- उद्योग, वन्य जीवन घरेलु व्यापर, सार्वजानिक व्यवस्था, तथा पुलिश, स्थानीय सरकार, स्वास्थ्य तथा सफाई का प्रबंधन, राज्य कर एवं शुल्क आदि शामिल है| किसी विषय पर यदि राज्य तथा केंद्र के बिच  मतभेद हो तो केंद्र सरकार को ऐसे मामले में सर्वोपरि शक्ति हो गयी है |

 

 

समवर्ती सूची

इस सूचि में 47 विषय रखा गया है जिसमे कुछ विषय निम्नं है फौजदारी, कानून तथा कार्यविधि, दीवानी कार्यविधि, विवाह, श्रम कल्याण, बिमा आर्थिक, तथा सामाजिक नियोजन, शिक्षा आदि शामिल है किसी विषय पर यदि राज्य तथा केंद्र के बिच मतभेद होता है तो केंद्र सरकार का मान्यता होता है  ऐसे मामले में सर्वोपरि केंद्र को शक्ति दी गयी है|

 

 

राज्यों का पुनर्गठन(State Reorganization)

भारत में ब्रिटिश प्रान्तों तथा पांच फ़्रांसिसी(चंदेंगौर, पांडिचेरी, कराइकल, माहे, यनम) अधीनस्थ क्षेत्र थे| यह कक्षेत्रो का विलय भारत में हुआ यह विलय या तो समझौतें के आधार पर या बल प्रयोग कर किया गया|

संरक्षित राज्यों(Protectotrate) सिक्किम का विलय

भारत में 26 अप्रैल 1975 को किया गया|

 

 

 

भारतीयों राज्यों का पुनर्गठन(Reorganization of Indian State)

 

राज्यों के पुनर्गठन के मुख्य आधार क्या है?

1 गठन के लिए मुख्य महत्वपूर्ण करक भाषा था|

2 यह सुनिशिचत करना की विभिन्न भाषाई समूह की शैक्षिक तथा सांस्कृतिक आवश्यकता को पर्याप्त रूप से पूरा किया जाय|  

 

 

उतर-पुनर्गठन परिवर्तन (Post Reorganization change)

राज्य  --  स्थापना

नागालैंड 1 दिसम्बर

मेघालय  2 अप्रैल 1970

मणिपुर   1971

त्रिपुरा     1971

मिजोरम    8 दिसम्बर 1986

अरुणाचल प्रदेश   8 दिसम्बर 1986

हिमाचल प्रदेश   26 जनवरी 1971

गोवा     30 मई 1987

छत्तीसगढ़  2 नवम्बर 2000

झारखण्ड  15 नवम्बर 2000




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