वर्ग 6th का पूर्ण नोट्स और quiz के साथ

  अध्याय 1 सौरमंडल

NCERT –National Council Education Research Training

पूर्णिमा – पूर्ण चन्द्र को एक महीने में एक full moon देखा जाता है | यह पूर्ण चन्द्रमा वाली रत पूर्णिमा कहलाता है |

15 day – light

15 day – dark

 

अमावस्या New Moon day

जिस समय चन्द्रमा का कला भाग पृथ्वी की तरह होता है , जिसे नए चन्द्रमा की रात्रि या आमवस्या

 

खगोलीय पिंड Celestial bodies

सूर्य चंद्रमा ,तारे तथा वे सभी वस्तुए जो रत के समय आसमान में चमकती है , खगोलीय पिंड कहलाता है | जैसे – तारे ,ग्रह एवं क्षुद्र ग्रह इत्यादी

 

तारा Star

इनके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है , जिसे वे उत्सर्जित करते रहते हैं जैसे – सूर्य ,डॉगस्टार आदि |

नक्षत्रमंडल – रात्रि के समय आसमान में तारो के विभिन्न समूहों द्वारा बनाई गई विविध आकृतिया दिखाई पड़ती है ये नक्षत्रमंडल कह्ताले हैं | जैसे – लिटिल वियर या सप्तऋषि (सप्त सात ऋषि संत) 7 star नक्षत्रमंडल उर्सा मेजर या विग का भाग नक्षत्रमंडल है |

ध्रुव तारा Pole Star

उतरी तारा उतर दिशा को बताता है इसे ध्रुव तारा कहते हैं |

ग्रह Planet

इसका अपना प्रकाश एवं ऊष्मा नहीं होता है ये तारो के प्रकाश से प्रकाशित होता है तारो की परिक्रमण कहते हैं | गुरुत्वाकर्षण बल होता है | खगोलीय पिंड को ग्रह कहते हैं | planet ग्रीक भाषा है planet ग्रीक अर्थ – परिभ्रमण अर्थात चारो ओर घुमाने वाला

सौरमंडल (Solar System)

सूर्य 8 ग्रह ,उपग्रह तथा अन्य खगोलीय पिंड जैसे क्षुद्र ग्रह एवं उल्का पिंड मिलकर सौरमंडल का निर्माण करते हैं जिसे परिवार भी कहते हैं’ सौरमंडल या सौर परिवार का मुखिया सूर्य को कहते हैं

 

सूर्य Sun

सूर्य सौरमंडल का सबसे बड़ा सदस्य हैयह पृथ्वी सौरमंडल केंद्र में स्थित है | सूर्य का व्यास पृथ्वी से लगभग 109 गुण ज्यादा है | सूर्य पृथ्वी से 15 km दूर है सूर्य हाईड्रोजन और हीलियम गैसों का एक भंडार है सूर्य का सदो अरबवा हिस्सा भाग पृथ्वी पर पहुचती है 48% वायुमंडल को गर्म करने में काम आता है

 

आंतरिक ग्रह Inner Planet

ये सूर्य से नजदीक का ग्रह है | आकर में छोटा तथा चट्टानें से बने होने के कारन भरी ग्रह है |बाह्य ग्रह outer planet – आकार में बड़े ग्रह हैं तथा गैस से बने होते हैं हल्का ग्रह होता है | सौरमंडल के 8 सभी ग्रह एक निशिचत पथ पर सूर्य का चक्कर लगते हैं | ये दीर्घ वृताकार हैं | ये कक्षा कहलाते हैं

 

बुध Murcury

बुध सूर्य के सबसे नजदीक का ग्रह है | यह आकार में सबसे छोटा होता है | अपनी कक्षा में सूर्य के चारो ओर एक चक्कर लगाने में केवल 88 दिन लगते है| यह तापान्तर ग्रह है|

शुक्र ग्रह Venus

सूर्य से दुरी के अनुसार यह दूसरा ग्रह है | यह आकार में 6 सबसे छोटा ग्रह है | शुक्र को पृथ्वी के जुड़वा ग्रह माना जाता है , क्योकि यह आकार एवं आकृति में लगभग पृथ्वी के सामान है | यह सूर्योदय के पहले एवं सूर्यास्त के पश्चात् देखा जाता है | इसे सुबह का तारा या mornnig star एवं शाम का तारा Evening star कहा जाता है

 

 

मंगल ग्रह Mars

लाल ग्रह भी कहा जाट है पृथ्वी की आधा है मंगल ग्रह सूर्य से दुरी के अनुसार चौथा ग्रह है | पृथ्वी की तरह मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है | अपनी भौगोलिक विशेषताओ के आलावा मंगल ग्रह का धूरणन काल और मौसमी चक्र पृथ्वी के समान है |

 

 

 

वृहस्पति Jupiter

यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है सबसे बड़ी ग्यानिमिद है इसकी उपग्रह की सख्या 67 है

शनि Saturn

यह सौरमंडल का सबसे सुन्दर ग्रह है | इसके चारो ओर चमकीला छल्ला है | शनि के 62 उपग्रह सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है | 75% हाईड्रोजन 25% हीलियम जाल ,मीथेन ,अमोनिया ,और पत्थर वर्फ के रूप में

 

अरुण uranus

अरुण ग्रह को भी चारो ओर छल्ला है इसकी खोज विलियन ने की थी

वरुण Neptune

आकर और बनावट में युरेनस के सामान है |

प्लूटो ग्रह को अंतराष्टीय खगोलीय संगठन ने 2006 में इसे बौने ग्रह का दर्जा दिया गया |

पृथ्वी Earth

पृथ्वी का नजदीक का तारा सूर्य है | आंतरिक ग्रह में सबसे (आकार) बड़ा ग्रह है | घ्रूव के थोड़ी चपटी है इसी के कारन इस ग्रह को भू आभ कहते हैं  भू आभ का अर्थ पृथ्वी के सामान आकार इसे नीला ग्रह भी कहते हैं | पृथ्वी को सौरमंडल का अदभुत गढ़ भी कहते हैं | इसे नीला गढ़ कहते हैं |

चन्द्रमा Moon

पृथ्वी का उपग्रह है चन्द्रमा पृथ्वी के व्यास से एक चौथाई है

पृथ्वी से 3,84,400 km दूर है | चन्द्रमा पृथ्वी का एक चकर लगभग 27 दिन में पूरा करता है | पृथ्वी सूर्य की किरणे को ही पृथ्वी पर परावर्तित करता है | जिस कारण पृथ्वी को रत में प्रकाश मिलता है |

ग्रहण Eclipse

ग्रहण एक खगोलीय धटना है | पृथ्वी तथा चन्द्रमा की परिक्रमण अवस्था के कारन ग्रहण की स्थिति उत्पन होती है |

ग्रहण दो प्रकार की होती है

(1) Lunar Eclipse – चन्द्र ग्रहण (2) Solar Eclipse  सूर्य ग्रहण

1 Lunar Eclipse (चन्द्र ग्रहण)

जब सूर्य एवं चन्द्रमा के बिच पृथ्वी जाती है | तब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ने लगती है |  इसके कारन चन्द्रमा का छाया वाला भाग दिखाई नहीं देता है |इस स्थिति को चन्द्र ग्रहण काहाते हैं |

यह  स्थिति पूर्णिमा के दिन होता है|

 

2 Solar Eclipse (सूर्य ग्रहण)

जब सूर्य एवं पृथ्वी के बिच चन्द्रमा जाता है, तब चन्द्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है | इसके कारन सूर्य का आंशिक या पूर्ण भाग दिखाई नहीं पड़ता है| इस स्थिति को सूर्य ग्रहण  कहते है| यह स्थिति आमवस्या के दिन होता है सूर्य से पृथ्वी की दुरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर

प्रकाश की गति 3,00,000 km/s

सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुचने में लगभग 8 minte का समय लगते हैं |

 

 

 

क्षुद्र ग्रह Asteroids

तारो ,ग्रहों  तथा उपग्रहों के अतिरिक्त असंख्य छोटे खगोलीय पिंड सूर्य के चरों चाकर लगाते हैं इन पिंडो को क्षुद्र ग्रह कहते हैं | मंगल एवं वृहस्पति ग्रह के बीच में पाया जाता है | हरः का ही भाग होता है जो कई वर्षो पहले विस्फोटक के बाद ग्रहों से टूटकर अलग हुआ है |

 

 

उल्का पिंड Meteors

आकाश में कभी कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत बैग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई पड़ते है , उन्हें उल्का कहते हैं  उल्काओ जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुचता है ,उसे उल्कापिंड कहते हैं

 

 

आकाशगंगा Milky Way

तारो के समूह  को आकाशगंगा कहते है | हमारा सौरमंडल इस आकाशगंगा का ही एक भाग है

आकाशगंगा का नाम प्राचीन भारत में आकाशगंगा की एक बहती नदी से की जाती है | आकाश गंगा कारोड़ो तारो , बदलो तथा गैसों की एक प्रणाली है | इस प्रकार की लाखो आकाश गंगाए मिलकर ब्रह्माण्ड का निर्माण करती है

 

उपग्रह satellite

­­­उपग्रह एक खगोलीय पिंड है , जो ग्रहों के चारो ओर उसी प्रकार चक्कर लगाता है  जिस प्रकार ग्रह सूर्य के चारो ओरचक्कर लगाते हैं | वृहस्पति का सर्वाधिक उपग्रह है | सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह ग्यानिमिड ganymede है जो वृहस्पति का उपग्रह है |

 

 

मानव निर्मित उपग्रह

वैज्ञानिक द्वारा बनाया गया पिंड है | इन उपग्रहों को प्रक्षेपण यां के द्वारा अंतरिक्ष में भेजा जाता है एवं पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाता है

Indian (satellite) इनसैट एडसैट I R S

चन्द्रमा पर चद्रायण प्रथम 2008 में भेजा जाता गया तथा चंद्रयान 2 2019 में भेजा गया |

उपयोग – Radio Television Telephone Mobile Internate

पृथ्वी का पहला मानव निर्मित कृत्रिम उपग्रह स्शुतानिक 1 सोवियत संघ (रूस) के द्वरा 4 october 1957

क्षुद्र ग्रह पट्टी में 945km के व्यास वाला सिरिस नामक एक बौना ग्रह है                   अपना ही ग्रुत्वकर्षण बल के कारन गोल आकार पा चूका है

 

 

 

 

सूर्य से दुरी के अनुसार ग्रह Trick

My Very Efficient Mother Just Served Us Nuts.

Murcury

 

New Moon day – अमावस्या   planet – ग्रह

Full Moon day – पूर्णिमा        Geoid – भू आभ

Constelliations – नक्षत्रमंडल          inner planet – आंतरिक ग्रह

Outer planet - बाह्य ग्रह       meteors - उल्ल्का

Pole star – घ्रूव तारा           star – तारा

Gravitation – ग्रुत्वकर्षण बल     moon – चन्द्रमा

 

 

 

 

अध्याय 2 ग्लोब आक्षांश एवं देशांतर

(Chapter 2 Globe latitude and longitude)

ग्लोब

ग्लोब पृथ्वी का लघुरूप में एक वास्तविक  प्रतिरूप है उसे ग्लोब कहते हैं

 

अक्ष (Axix)

एक सुई ग्लोब में झुकी हुई अवस्था में स्थित है , जिसे अक्ष कहते हैं

 

ध्रुव (Pole)

ग्लोब के वे दो बिंदु जिससे होकर सुई गुजरती है उसे घ्रूव कहते हैं | उतर एवं

दक्षिण में घ्रूव

 

विषुवत रेखा (Equater Line)

पृथ्वी के बीचो बिच गुज्स्रने वसली क्स्ल्पनिक रेखा कहलाता है | विषुवत रेखा वृत्त को 00

शून्य अंश द्वारा दर्शया गाया है

अक्षांश latitude – विषुवत रेखा से घ्रुवो तक सभी समान्तर रेखा अक्षांश रेखा कहते हैं

231/2डिग्री  उतर  - कर्क रेखा

231/2डिग्री  दक्षिणी मकर रेखा

अक्षांश रेखा की कुल संख्या 182 है दो अक्षांश रेखाओ की बिच की दुरी 111km है

अक्षांश रेखा हमेशा पूरब से पशिचम की ओर खिंची जाती है

 

महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाए (Important latitude line)

विषुवत रेखा से किसी सामान कोणीय दुरी वाले स्थान को मिलाने वाली रेखा को अक्षांश रेखा कहते हैं|

अक्षांश रेखा सदैव पूर्व से पशिचम की ओर खिंची जाता है

 

महत्वपूर्ण अक्षांश रेखा

 

उतरी गोलार्ध्द में कर्क रेखा 231/2 डिग्री

दक्षिणी गोलार्ध्द में मकर रेखा 231/2 डिग्री .

उतरी गोलार्ध्द में उतरी ध्रुवीय वृत्त 661/2 डिग्री .

दक्षिणी गोलार्ध्द में दक्षिणी ध्रुवीय वृत्त 661/2 डिग्री .

 

 

 

पृथ्वी के ताप कटिबंध (EarthTropics/Earth Heat Zone)

दो अक्षांश रेखाओ के बिच का भाग कटिबंध कहलाता हैपृथ्वी के अंपने अक्ष ओर झुकी

होने के कारन कर्क रेखा और मकर रेखा के बिच सूर्य की किरणे वर्ष भर लगभग

लम्बवत पड़ती है , इसलिए इस क्षेत्र में सर्वाधिक सूर्यताप की प्राप्ति होती है उसे उष्ण

कटिबंध कहा जाता है | वर्ष भर ग्रीष्म ऋतू रहती है

 

शीतोष्ण कटिबंध Temprate zone

कर्क रेखा मकर रेखाओ से ध्रुवो की ओर सूर्य की किरणे तिरछी होती जाती है यही

कारण है की उतरी गोलार्ध्द में कर्क रेखा एवं उतरी ध्रुवीय वृत तथा दक्षिणी

गोलार्ध्द विषुवत में मकर रेखा एवं दक्षिणी ध्रुवीय वृत्त के बिच वाले भाग का बिच

माध्यम होता है इसलिए इसे  शीतोष्ण कटिबंध कहते हैं  यहाँ वर्ष में शीत ऋतू एवं

ग्रीष्म ऋतू दोनों का अनुभव किया जाता है |

 

शीत कटिबन्ध (Frigid zone)

 

उतरी गोलार्ध्द में उतरी ध्रुवीय वृत एवं उतरी ध्रुव तथा दक्षिणी गोलार्ध्द में दक्षिणी

ध्रुवीय वृत्त तथा दक्षिणी ध्रुव के बिच वर्ष भर अत्यधिक ठंडा का अनुभव किया जाता

है | क्योंकि  यहाँ सूर्य की किरणे अत्यधिक तिरछी पड़ती है | अत: इस प्रदेश में न्यूनतम सूर्यताप की प्राप्ति होती है | इसलिए इसे शीत कटिबंध कहते हैं

 

 

देशांतर क्या है? (What is longitude)

देशांतर रेखा भी एक काल्पनिक रेखा है जो उतरी एवं दक्षिणी ध्रुवो को मिलाती

हुई खिची जाती है संयुक्त राज्य अमेरिका की राज्यधानी वांशिगटन डी सी में

अंतराष्ट्रीय याम्योतर सम्मलेन में (व्रिटेन) ब्रिटिश राजकीय वेधशाला स्थित है इसे 00

देशांतर रखा गया | ग्रीनविच से 1800  पशिचम तक गणना करते हैं देशांतर की कुल

संख्या 360 है | देशांतर रेखाए उतर से दक्षिण खिंची जाती है |

00 एवं 1800 दोनों मिलकर पृथ्वी को दो सामान भगो में बाटते हैं East पूर्वी गोलार्ध्द

एवं west पशिचमी गोलार्ध्द

1800 पूर्व देशांतर रेखा एक ही रेखा है

देशांतर रेखाए अर्धवृत होती है|

दो देशांतर रेखाए के बिच की दुरी 111.32 km होती है ध्रुवो की ओर जाने पर घट कर

शून्य हो जाता है

देशांतर को अंश डिग्री में मापा जाता है

अंश को मिनट में, मिनट को सेकेण्ड में विभाजित किया जाता है

ग्रिड grid – ग्लोब पर अक्षांश रेखाए एवं रेखायो के जाल को ग्रिड कहा जाता है |

ग्लोब भी किसी भी पता को खोजना आसान जहा दोनों रेखाए एक दुसरे को कटती है|

यह बिंदु रांची शहर की सही स्थिति को बतायगा |

 

अक्षांश

देशांतर (उध्र्वधर )

देशांतर और समय longitude and time – समय को मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी एवं ग्रहों की गति है

देशांतर रेखा का उपयोग किसी समय निर्धारित करना |

10 – 4 मिनट              10 = 60 मिनट

150 – 4*15 = 60 मिनट    1 मिनट  60’’ second

3600 – 24 hours

ग्रीन विच से गुजरने वाली प्रधान मध्याहन रेखा या प्रधान याम्योतर के

पूर्व स्थित देशो में सद्येव आगे और पशिचम स्थित देशो में सदैव पीछे

रहता है मानक समय Standard Time भारत में गुजरने से लेकर अरुणाचल

प्रदेश तक के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटा का अंतर है क्योकि भारत के

पूर्वी एवं पशिचम भाग के देशांतर में लगभग 300 का अंतर है भारत के बीचो

बिच गुजरने वाली देशांतर रेखा का मान 82 1/20 East हैयह U.P के

मिर्जापुर से होकर गुजराती है 82 1/20 पूर्वी को भारतीय मानक समय(I.S.T)

Indian standard time अन्तराष्ट्रीय तिथि रेखा International date line

1800 देशांतर रेखा को अन्तराष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है| यह बेरिंग जल

सन्धि एवं प्रशांत महासागर से होकर गुजरती है

 

 

 

 

अध्याय 3 पृथ्वी की गतियाँ Motion of Earth

पृथ्वी में दो प्रकार की गति होती है | इन गतियो के कारन ही दिन रत एवं ऋतू परिवर्तन जैसे घटनाए घटित होती है

पृथ्वी के दो गति

1 घूर्णन 2 परिक्रमण

1 घूर्णन (Rotation)

पृथ्वी का अपने अक्ष पर घुमाना ही घूर्णन कहते हैं | पृथ्वी का एक अक्ष एक काल्पनिक रेखा है जो इसके कक्षीय सतह से 66 1/20 का कोण बनाती है | घूर्णन करते समय पृथ्वी पशिचम से पूरब की ओर गति कराती है (लट्टू की तरह) पृथ्वी को अपने अक्ष पर एक दिन का समय है| यही कारण है की इसे पृथ्वी की क्षैतिज दैनिक गति भी कहते हैं|

कक्षीय समतल (Axial plane)

वह समतल जो कक्ष के द्वारा बनाया जाता है, कक्षीय समतल कहते हैं|

 

प्रदीप्त वृत्त किसे हैं ?

ग्लोब पर वह वृत्त जो दिन और रात को विभाजित करता है, उसे प्रदीप्त कहतें हैं |

 

घूर्णन गति का महत्व

पृथ्वी की घूर्णन गति के कारन दिन एवं रात होते हैं | पृथ्वी की आकृति गोल है | इस कारन एक समय में सिर्फ इसके आधे भाग पर सूर्य की रोशनी प्राप्त होती है | यदि पृथ्वी की घूर्णन गति रुक जाए ऐसी स्थिति में पृथ्वी के आधे भाग में हमेशा दिन एवं आधे भाग में हमेशा रात होगी |

 

परिक्रमण

पृथ्वी सूर्य के चारो ओर एक दीर्घ वृताकार पथ में गति करती है

इसे परिक्रमण गति कहते हैं | पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर

लगाने में 3651/4 दिन या 365 day 6 hour है यही कारन है

कि परिक्रमण गति को पृथ्वी की वार्षिक गति भी हो सकती है| पृथ्वी की घूर्णन एवं परिक्रमण गति साथ-साथ होती है| लगभग 1600km/h होती है पृथ्वी की परिक्रमण गति 30km/s है |

 

 

 

लीप वर्ष (Leap Year)

जिस वर्ष में फरवरी का महिना 29 दिनों का होता है |यानि जिस वर्ष में 366 दिन होते है उसे लीप वर्ष कहते है | परिक्रमण गति का काल 365 दिन और 6 घंटो का होता है |चार वर्ष में ये 6 घंटे 6×4=24 घंटे एक दिन का बराबर हो जाता है so लीप वर्ष 365 दिनों का होता है | जो वर्ष संख्या 4 से पूर्णतः विभाजित हो जाता है, वर्ष लीप वर्ष कहते है|

eg:- 2016 ÷ 4 =504, 2020÷4=404

शताब्दी वर्ष में 400 से विभाजित होता है तो

वह लीप वर्ष कहते है | eg:2000/400 = लीप वर्ष

29 फरवरी का जन्म हुए व्यक्ति का जन्मदिन फिर 4 वर्ष के बाद मनायेगा |

परिक्रमण गति का महत्व्

पृथ्वी की परिक्रमण गति एवं अक्ष के झुकाव के कारन ऋतू परिवर्तन होता |

ऋतुये –गर्मी,सर्दी ,वर्षा एवं शरद

पृथ्वी के अक्ष 23½0 के कोण पर झुका हुआ है | झुकाव के कारन उतरी गोलार्ध एवं दक्षिणी गोलार्ध क्रमश: सूर्य की तरफ झुकी हुई होती है

उतरी धुर्व सूर्य के करीब है | इसी के कारन उतरी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतू है

21 जून को कर्क रेखा पर सीधी किरणे पड़ती है | उतरी गोलार्ध मर सबसे लम्बा दिन एवं सबसे छोटी रत होती है | इस समय आर्कटिक वृत्त के क्षेत्रो में लगभग 6 माह का दिन होता है , और आर्कटिक वृत्त के क्षेत्रो में 6 माह की रात होती है | दक्षिणी गोलार्ध में इस समय शीत ऋतू होती है |

21 मार्च और 23 सितम्बर को सूर्य के किरणे विषुवत रेखा पर सीधी पड़ती है | दिन एवं रत बराबर होती है | इसे विषुवत रेखा कहते हैं इसके विपरीत 23 september को उतरी गोलार्ध में शरद ऋतू तथा दक्षिणी गोलार्ध में वसंत ऋतू होती है |

पृथ्वी की परिक्रमण कक्ष की कुल लम्बाई 965 मिलियन km

सूर्य पूरब में उगता है और पशिचम में डूबता है | क्यों

सूर्य पूरब दिशा में उगता हुआ और पशिचम में डूबता हुआ इसलिए लगता है क्योकि पृथ्वी अपनी धुरी पर लगातार घुमती है और यह सूर्य के चारो और चक्कर लगाती है | चुकी पृथ्वी पशिचम में पूरब की ओर और अपनी घुरी पर घुमती है | इसलिए हमें ऐसा लगता है की सूर्य पूर्व में उगता है | और पशिचम में डूबता है

ऋतू परिवर्तन परिक्रमण गति से

दिन रात गर्मी,सर्दी,वर्षा,एवं शरद

धुवो पर 6 माह का दिन और 6 माह की रात होती है क्यों ?

पृथ्वी अपनी धुरी पर 23½0 झुकी हुई घुमती है , धुर्व और दक्षिणी धुर्वो पर तो सूरज वर्ष में एक बार उगता है और एक बार डूबता है , जिसका परिणाम होता है की लगभग 6 महिने रात और 6 महिना दिन

 

 

Chapter 4 मानचित्र (Map)

मानचित्र – मानचित्र पृथ्वी की सतह या उसके एक भाग का पैमाने के माध्यम से चपटी सतह पर खिंचा गया चित्र है

मानचित्र एक बड़े क्षेत्र का छोटा रुपचित्रण है |

पृथ्वी की एक भाग का अध्धयन करने के लिए मानचित्र ग्लोब से ज्यादा उपयोगी है |

कई मानचित्र को – एटलस ATLAS बन जाता है

मानचित्रो से ज्यादा एटलस का उपयोगी है

There are various map in geography

भौतिक मानचित्र physical map 23½0

पृथ्वी की प्राकृतिक आकृतियो जैसे प्रवर्तो, पाठारो,मैदान,झीलों नदियों महाशागारो इत्यादि को दर्शाने वाले मानचित्र को भौतिक मानचित्र कहते हैं  इस मानचित्र में विभिन रंगों का प्रयोग

निला – जल

हरा – मैदान

पिला – पठार

लाल – पर्वत

राजनितिक मानचित्र political map

राज्यों, नगरो, शहरों ,गावोऔर विश्व के विभिन देशो तथा उनकी सिमयो को दर्शाने वाले मानचित्र को राजनितिक कहा जाता है

थिमैतिक मानचित्र thematic map

वैसे मानचित्र जिनसे  विशेष जानकारीयां प्राप्त करती है| जैसे :-  सड़क, वर्षा, वन, रेल तथा उद्योग आदि का वितरण दर्शाने वाले मानचित्र को थीमैटिक मानचित्र कहा जाता है|

 

झारखण्ड का चौहदी

पूरब में (East)      :- पशिचम बंगाल

पशिचम में(West) :- छत्तीसगढ़ / उतरप्रदेश उतर में (North)    :- बिहार    

दक्षिण में (South) :- ओड़िसा

                                          

मानचित्र की भाषा

मानचित्र में तथ्यों को दर्शाने के लिए शब्दे के बदले चिन्हों का प्रयोग होता है| in चिन्हों को ही मानचित्र की भाषा कहतें हैं|

 

मानचित्रो के निम्नलिखित प्रमुख तत्व है|

Ans पैमाना, प्रतिक चिन्ह, दिशा तथा रंग|

 

  

पैमाना(Scale)

स्थल पर वास्तविक दुरी तथा मानचित्र पर दिखाई गयी दुरी के बिच के अनुपात को पैमाना कहतें हैं|

पैमाना के आधार पर मानचित्र दो प्रकार के होतें हैं|

a छोटें पैमाना वाला मानचित्र

b बड़े पैमाना वाला मानचित्र

 

a छोटें पैमाना वाला मानचित्र

जब बड़े क्षेत्रफल वाले भू भाग जैसे देशो महाद्वीपों आदि को कागज पर दिखाने हेतु छोटे पैमाना का उपयोग किया जाता है| जैसे किसी मानचित्र पर जब 5 cm स्थल के २०० km को दर्शाती है तो इसकी छोटें पैमाना वाला मानचित्र कहलाता है|

 

 

b बड़े पैमाना वाला मानचित्र

जब छोटें क्षेत्र वाले भू भाग जैस एगाओं शहर्चादी की दिखाना होता है तो बड़े पैमाना का उपयोग किया जाता है

प्रतिक (चिन्ह) रूढ़ चिन्ह 

Ans 1. रेलवे :- बड़ी लाइन,मीटर लाइन,रेलवे स्टेशन

बड़ी लाइन

मीटर लाइन

रेलवे स्टेशन

 

 

2. नदी,कुआ,तालाब,नहर पुल

 

नदी

कुआ

तालाब

 

नहर पुल

 

3. सड़के:पक्की,कच्ची

 

 सड़के

 पक्की सड़क

  कच्ची सड़क

4. सीमा : अंतराष्ट्रीय, राज्य, जिला

दिशा – ऊपर दाहिने तरफ एक तीर

मुख्य रूप से 4 दिशा होती है – उतर,दक्षिण,पूर्व,पशिचम(प्रधान दिगिबंदु)

Ex जल – नीला रंग

रेलमार्ग – कला रंग

बन वनस्पति – हरा

कृषि – पीले 

रेखाचित्र –

एक कागज पर उसका कच्चा नक्शा बनता है | इस कच्चे नक़्शे को ही रेखाचित्र कहते हैं |

खाका –

एक छोटे क्षेत्र का बड़े पैमाने पर खिंचा गया रेखाचित्र खाका कहलाता है|

 

WORD MEANING

Map – मानचित्र    Colour – रंग    Conventional sing – रूढ़ चिन्ह

Plan – खाका     Compass – दिक सूचक   Sketch – रेखाचित्र Direction दिशा  Physical Map – भौतिक मानचित्र   Political Map – राजनितिक मानचित्र  Thematic Map – थीमैटिक मैप  Scale – पैमाना

 

 

 

अध्याय 5 पृथ्वी के प्रमुख परिमंडल 6th

स्थलमंडल

:- पृथ्वी के ठोस भाग जिस पर हम रहते हैं उसे स्थलमंडल कहते हैं

 

वायुमंडल :- वाटू की परते जो पृथ्वी को चारो ओरसे घेरती है , उसे वायुमंडल कहते हैं |

 

जलमंडल

:- पृथ्वी के बहुत बड़े भाग पर पाया जाता है ,जिसे जलमंडल कहते हैं

 

जैवमंडल

:- एक सिमित क्षेत्र है , जहा मिलते हैं तथा सभी प्रकार के जिव पाए जाता है | उसे जैवमंडल कहते हैं

 

1 स्थल मंडल

:- पृथ्वी की सतह को दो भागो में बता गया है |

महाव्दिप :- बड़े स्थालिय भू – भाग को महाव्दिप कहलाता है | महासागरीय बेसिंग :- बड़ा जलाशयों को महासागरीय बेसिंग कहते हैं |

विश्व का सबसे उचा शिखर माउन्ट एवरेस्ट की उचाई समुन्द्र तल से 8848m है | महाव्दिप – स्थल भाग है

 

पृथ्वी पर 7 महाव्दिप है |

1 एशिया  

2 अफ्रीका

3 उतरी अमेरिका

4 दक्षिणी अमेरिका

5 अन्टार्टिका

6 यूरोप

7 आस्ट्रेलिया |

 

1. एशिया Asia

सबसे बड़ा महाव्दिप है यह पूर्वी गोलार्ध्द में स्थित है कर्क रेखा इस महाव्दिप से होकर गुजरती है | एशिया के पशिचम में यूराल पर्वत एवं यूराल नदी है, जो इसे यूराल से अलग करता है |

 

2. अफ्रीका Africa

विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महाव्दिप है | विषुवत वृत्त इस महाव्दिप के लगभग मध्य भाग से होकर गुजराती है | अफ्रीका का बहुत बड़ा भाग उतरी गोलार्ध्द में स्थित है | जिससे होकर कर्क रेखा विषुवत रेखा तथा मकर रेखा के तीनो रेखा गुजराती है | सहारा रेगिस्तान विश्व का सबसे बड़ा गर्म रेगिस्तान है, जो अफ्रीका में स्थित है | अफ्रीका महाव्दिप चारो तरफ महासागरो से घिरा है | अफ्रीका के बिच में घने जंगल है | यह महाव्दिप उतरी एवं दक्षिणी गोलार्ध्द में स्थित है |

 

3. उतरी अमेरिका North america

विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उपमाहाव्दिप है | आर्कटिक महासागर इस महाव्दिप की उतरी सीमा का निर्धारिन करता है |

पूर्व – अटलांटिक महासागर

पशिचम – प्रशांत महासागर

दक्षिण – दक्षिणी अमेरिका

यह दक्षिण अमेरिका से एक संकरे स्थल से जुड़ा है , जिसे पनामा जलसन्धि कहलाता है | यह महाव्दिप पूरी तरह से उतरी एवं पशिचम गोलार्ध्द में स्थित है |

 

4. दक्षिणी अमेरिका South america

यह विश्व का चौथा सबसे बड़ा महाव्दिप है |

विश्व की सबसे लम्बी पर्वत श्रंखला इंडीज इस महाव्दिप के पशिचमी भाग में उतर से दक्षिण की ओर फैली है | अमेजन जो विश्व की सबसे बड़ी मादी द्रोनी का निर्माण कराती है , इसी महाव्दिप में बहती है |



5. अंटाकर्टिका Antarctica


5 वा सबसे बड़ा महाव्दिप है| पूरी तरह दक्षिणी गोलार्ध्द में स्थित है | दक्षिणी ध्रुव इस महाव्दिप के मध्य में स्थित है | यह हमेशा मोटी वर्फ की परतो से ढाका रहत है  


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