गुल्ली - डंडे का खेल

स्कूली बच्चे आज शहरों में पराया हर जगह छोटे मैदान या मकान के सामने के खुले मैदानों में भी क्रिकेट के बल्ले और गेंद के साथ खेलते कूदते उछलते नजर आते है। क्रिकेट का खेल इन दिनों अपने देश में भी काफी प्रचलित और लोकप्रिय होता जा रहा है। क्रिकेट एक विदेशी खेल है। क्रिकेट के साथ-साथ विदेशी खेलों में फुटबॉल वॉलीबॉल टेनिस और हॉकी भी हमारे देश के नगरों उप नगरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंच गए थे तभी भी हमारे गांव के बच्चे खेलते अवश्य थे। उनके लोकप्रिय और प्रचलित है खेलों में कबड्डी गुल्ली डंडा सिक्का आदि प्रमुख थे
                     गुल्ली डंडा हमारे ग्रामीण जीवन एवं क्षेत्र का एक प्रमुख और प्रचलित खेल है। इस खेल के लिए एक छोटा सा मैदान लकड़ी का बास के एक छोटे डंडे और काट की 4 इंच से 6 इंच तक की गुल्ली की आवश्यकता होती है । एक ही बारी में कोई लड़की बारी बारी से खेल खेलते हैं। इस खेल में शारीरिक व्यवस्था के साथ-साथ मानसिक व्यवस्था भी होता है। हाथ की सफाई के साथ मानसी की निशानेबाजी का भी अभ्यास इस खेल में होता है। या खेल मनोरंजन और स्फूर्तिदायक तो है, पर इसमें संभावित खतरे की आशंका भी कम नहीं है। निशाना चूक जाने पर दूर खड़े लड़के गोली से चोट खा सकते हैं और दो दलों के बीच संघर्ष का यह  कारण बन सकता है । अतः इस खेल में पूरी सतर्कता एवं मानसिक नियंत्रण आवश्यक और अपेक्षित है।।।।

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