सामान्य भाषा में , दर्शन ' बुद्धि का विज्ञान है। प्लेटो और अरस्तू के लिए यह सत्य की खोज है अस्पष्ट दर्शन का क्षेत्र इतना अधिक व्यापक है कि यह किसी वस्तु की व्याख्या करने की वजह हर एक वस्तु की व्याख्या करने का प्रयास करता है। है का परीक्षण करता है वह कैसा होना चाहिए। यह केवल भौतिक जगत तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह दार्शनिक प्रश्नों के बारे में भी विवेचन करता है या ना तो किसी पूर्व स्थापित वैज्ञानिक प्रक्रिया के नियमों और ना ही सही प्रमाण की आवश्यकता व सीमित है बल्कि इसके अंतर्गत योग्य परीक्षा से परिकल्पना लोग भी आ जाता है
हैलोवेल के अनुसार दर्शन अर्थ की तलाश है आया हमारे ज्ञान की कुछ विवेकशील सार्थक प्रतिमाओं में सच संशिल्ष्ट करने का प्रयास करता है। दर्शन का वास्तविक उद्देश्य हमारे ज्ञान को मात्र बढ़ाना नहीं बल्कि उसे अधिग्रहण करना भी है जब इसे राजनीतिक घटनाओं के अध्ययन पर लागू किया जाता है तो यह राजनीतिक दर्शन बन जाता है
राजनीतिक दर्शन का संबंध राजनीतिक शास्त्र के मौलिक सिद्धांतो से है और यह राजनीतिक विचारधारा के विकास के बारे में खोज करता है। दर्शन का आधार विज्ञान ना होकर कल्पना वह तर्क होता है राज्य से संबंधित विषयों का आधार भी कल्पना का व तर्क होता है । उदाहरणार्थ , राज्य की उत्पत्ति किस प्रकार हुई राज्य की प्रकृति कैसी है उसके उद्देश्य क्या है आदि
जो विचारक राज्य से बंधी अध्ययन को राजनीतिक दर्शन का नाम देना चाहते हैं उनका कहना है कि हमारे विषय के अध्ययन की प्रकृति वस्तुतः दाने के अथवा दार्शनिक है जिसमें हम राजनीतिक संस्थाओं से संबंधित बुनियादी सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं उनके वास्तविक क्रियाकलापों का नहीं।
फिर भी राज्य संबंधित विद्या का अध्ययन करने वाले विषय को राजनीतिक दर्शन कहना इसके क्षेत्र को संकुचित करना है राजनीतिक विज्ञान के दो पक्ष हैं संविधानिक तथा प्रयोगात्मक राजनीतिक दर्शन शब्द प्रयोगात्मक पहलू का विवेचन ही नहीं करता है राजनीतिक दर्शन के अंतर्गत व समस्त विषय सामग्री नहीं आती जो राजनीतिक विज्ञान के अंतर्गत आती है । गिलक्राइस्ट किस शब्दों में राजनीतिक दर्शन एक दृष्टि से राजनीतिक विज्ञान का पूर्वगामी है क्योंकि प्रथम (राजनीति दर्शन ) की मौलिक मान्यताओं पर भी द्वितीय (राजनीतिक विज्ञान) आधारित है , साथ ही राजनीति के दर्शन को भी स्वयं बहुत-सी ऐसी सामग्री का प्रयोग करना पड़ता है , जो उसे राजनीतिक विज्ञान से प्राप्त होती है वस्तुत: राजनीतिक विज्ञान शब्द से अभिप्राय में एक ऐसी व्यापकता एवं सुनिश्चित है जो राजनीतिक दर्शन में नहीं पाई जाती है राज्य संबंधि ज्ञान भंडार को राजनीतिक दर्शन की संज्ञा देना उपयुक्त नहीं है
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