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प्रेस-विज्ञप्ति 

केंद्र सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के विधर्थियों को छात्रवृति देने पर रोक लगाकर गरीब निर्धन बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने पर रोक लगा दी है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार ने सत्र 2022-23 के लिए प्री-मैट्रिक कक्षा 1 से 10 तक के अल्पसंखयक समुदाय के छात्रों को 15 नवंबर 2022 तक ऑनलाइन आवेदन करने का तिथि निर्धारित किया था। झारखंड के लगभग सभी जिले से विधर्थियों ने छात्रवृति हेतु ऑनलाइन आवेदन दिया। उसके आवेदन को संस्थानों ने भी सत्यापित कर आगे प्रेषित कर दिया था। अचानक उन आवेदनों को शिक्षा अधिकार अधिनियम 2019 का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे ही नहीं बल्कि ,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति पिछड़ा समुदाय के लाखों बच्चे छात्रवृति पाने से वंचित हो जाएंगे।

सरकार ने एक नोटिस में संस्थान के नोडल अधिकारी (INO)/जिला नोडल अधिकारी (DNO)/राज्य नोडल अधिकारी (SNO) को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत केवल कक्षा 9 और 10 के लिए आवेदनों को सत्यापित करने के लिए कहा है। सरकार ने उस नोटिस में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 का हवाला देते हुए कहा है कि प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8) प्रदान करना सरकार के लिए अनिवार्य बनाता है। ऐसे में केवल कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले छात्रों को ही सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और जनजातीय मामलों के मंत्रालय की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कवर किया जाएगा। इससे पहले तक प्री-मैट्रिक स्कॉमलरशिप अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की शिक्षा को कवर करती थी।

यूनाईटेड मिल्ली फोरम झारखंड केंद्र सरकार से यह मांग करती है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2019 का हवाला देते हुए कक्षा प्रथम से दशम तक के विधार्थियों को छात्रवृति पर रोक लगाने का जो निर्णय लिया है उसे अविलंब वापस ले और अगर नहीं लेते हैं तो उन सभी छात्रों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराये।


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