डेविड और गोलियथ की कहानी

डेविड और गोलियथ की कहानी 
हम सभी बाइबल  में बताई गई डेविड और गोलियथ की कहानी जानते हैं । गोलियथ एक राक्षस था । उसने हर आदमी के दिल में अपनी दहशत बैठा रखी थी।  1 दिन 17 साल का एक भेड़ चराने वाला लड़का अपने भाइयों से मिलने के लिए आया । उसने पूछा तुम लोग इस राक्षस से लड़ते क्यों नहीं हो ? उसके भाई गोलियथ से डरते थे।  उन्होंने जवाब दिया क्या तुमने देखा नहीं कि वह इतना बड़ा है कि उसे मारा नहीं जा सकता ?  इस पर डेविड ने कहा बात यह नहीं है कि बड़ा होने की वजह से उसे मारा नहीं जा सकता बल्कि हकीकत यह है कि वह इतना बड़ा है कि उस पर लगाया गया निशाना चूक ही नहीं सकता।  उसके बाद जो हुआ वह सबको मालूम है डेविड ने उस राक्षस को गुलेल से मार डाला। राक्षस वही था लेकिन उसके बारे में डेबिट का नजरिया अलग था । हम नाकामयाबी को कैसे देखते हैं यह हमारे नजरिए से तय होता है । सोने की तलाश में
 एंड्रयू कार्नेगी अपने बचपन के दिनों में ही स्कॉटलैंड से अमेरिका चले गए । उन्होंने छोटे-मोटे कामों से शुरुआत की, और आखिरकार अमेरिका में स्टील बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के मालिक बन गए। एक ऐसा वक्त आया जब उनके लिए 43 करोड़पति काम करते थे । करोड़ रुपए इस जमाने में भी बहुत होते हैं लेकिन सन् 1920 के आसपास तो उनकी बहुत ज्यादा कीमत थी । किसी ने कार्नेगी से पूछा , आप लोगों से कैसे पेश आते हैं? उन्होंने जवाब दिया  लोगों से पेश आना काफी हद तक सोने की खुदाई करने जैसा ही है । हमको एक तोला सोना खोद निकालने के लिए कई टन मिट्टी हटानी पड़ती है। लेकिन खुदाई करते वक्त हमारा ध्यान मिट्टी पर नहीं, बल्कि सोने पर रहता है। एंड्रयू कार्नेगी के जवाब में एक बहुत महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है । हो सकता है कि किसी इंसान या किसी हालत में कोई अच्छी बात साफ तौर पर ना दिखाई दे रही हो । ऐसीे हालात में हमें उसे गहराई में जाकर तलाशना होगा इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि अगर हम किसी इंसान या किसी चीज में कमियां ढूंढेंगे तो हमको ढेरों कमियां दिखाई देगी। लेकिन हमें किस चीज की तलाश है सोने की या मिट्टी की? कमियां ढूंढने वाले तो स्वर्ग में भी कमियां निकाल देंगे अधिकतर लोगों को वही मिलता है जिसकी उन्हें तलाश होती है
जरुरी नहीं है कि शिक्षित व्यक्ति सही फैसला करें । एक आदमी सड़क के किनारे समोसे बेचा करता था । अनपढ़ होने की वजह से वह अखबार नहीं पड़ता था। ऊंचा सुनने की वजह से रेडियो नहीं सुनता था ,और आंखें कमजोर होने की वजह से उसने कभी टेलीविजन भी नहीं देखा था । इसके बावजूद काफी समोसे बेच लेता था । उसकी बिक्री में लगातार बढ़ोतरी होती गई । उसने और ज्यादा आलू खरीदना शुरू किया, साथ ही पहले वाले चूल्हे से बड़ा और बढ़िया चूल्हा खरीद कर ले आया। उसका व्यापार लगातार बढ़ रहा था , तभी हाल ही में कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल कर चुका उसका बेटा पिता का हाथ बटाने के लिए चला आया । उसके बाद एक अजीबोगरीब घटना घटी । बेटे ने उस आदमी से पूछा पिताजी क्या आपको मालूम है कि हम लोग एक बड़ी मंदी का शिकार बनने वाले हैं  ? पिता ने जवाब दिया नहीं लेकिन मुझे उसके बारे में बताओ।  बेटे ने कहा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बड़ी गंभीर है। घरेलू हालात तो और भी बुरे हैं। हमें आने वाले बुरे हालात का सामना करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए । उस आदमी ने सोचा कि उसका बेटा कॉलेज जा चुका है अखबार पढ़ता है और रेडियो सुनता है इसलिए उसकी राय को हल्के ढंग से नहीं लेना चाहिए।  दूसरे दिन में उसने आलू की खरीद कम कर दी और अपना साइन बोर्ड नीचे उतार दिया । उसका जोश खत्म हो चुका था। जल्दी ही उसी दुकान पर आने वालों की तादाद घटने लगी और उसकी बिक्री तेजी से गिरने लगी । पिता ने अपने बेटे से कहा, तुम सही कह रहे थे । हम लोग मंदी के दौर से गुजर रहे हैं । मुझे खुशी हुई है की तुमने वक्त से पहले ही सचेत कर दिया।
 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है इससे यह नतीजे निकलते हैं हम अपनी सोच के मुताबिक खुद को आत्म संतुष्ट करने वाली भविष्यवाणियां कर देते हैं। दूसरा कई बार हम बुद्धिमता को अच्छा फैसला मानने की गलती भी कर बैठते हैं । तीसरा एक इंसान ज्यादा बुद्धिमान होने के बावजूद गलत फैसला कर सकता है । चौथा सलाहकार सावधानी से चुनिए लेकिन अमल अपने ही फैसले पर करिए । अगर किसी इंसान में ये गुण हैं तो वह सफल हो सकता है बिना स्कूली शिक्षा के 
चरित्र प्रतिबद्धता दृढ़ विश्वास साहस । बहुमुखी शिक्षा क्या है?
 एक जंगल में कुछ जानवरों में स्कूल शुरू करने का फैसला लिया। छात्रों में एक चिड़िया ,एक गिलहरी, एक मछली , एक कुत्ता, एक खरगोश और दिमागी तौर पर कमजोर इल मछली शामिल थी। पाठ्यक्रम तय करने के लिए एक बोर्ड बनाया गया। बोर्ड ने तय किया कि छात्रों को बहुमुखी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें उड़ना पेड़ पर चढ़ना तैरना और बिल खोदना सिखाया जाएगा । हर जानवर को सभी तालीम हासिल करने की पाबंदी थी । चिड़िया उड़ान भरने में माहिर थी उसने इस विषय में A ग्रेड हासिल किया लेकिन जब बिल खोदने की बारी आई तो वह अपनी चोंच और पंख तोड़ बैठी और असफल साबित होने लगी । इस नाकामयाबी का उस पर ऐसा असर पड़ा कि जल्द ही उसे उड़ान भरने में भी C ग्रेड मिलने लगा । पेड़ पर चढ़ने में और तैरने में तो वह फेल ही हो गई । गिलहरी पेड़ पर चढ़ने में काफी कुशल थी लेकिन वह तैरने में असफल हुई। मछली सबसे अच्छी तैराक थी लेकिन वह पानी के बाहर निकल ही नहीं सकती थी इसलिए बाकी सभी विषयों में फेल हो गई । कुत्ता स्कूल गया ही नहीं उसने फीस भी जमा नहीं की, और प्रबंधकों से इस बात को लेकर झगड़ा रहा कि पाठ्यक्रम में भोकना भी शामिल किया जाए। खरगोश को बिल खोदने में A ग्रेड मिला लेकिन उसके लिए पेड़ पर चढ़ना बहुत बड़ी समस्या थी वह बार-बार असफल होता रहा और एक दिन जमीन पर इस प्रकार बुरी तरह गिरा कि उसे ब्रेन डैमेज हो गया । वह बच तो गया लेकिन उसके दिमाग पर ऐसा असर पड़ा कि उसे बिल खोदने में भी दिक्कत होने लगी और उसे इस विषय में भी C ग्रेड मिलने लगा। आखिरकार दिमागी तौर पर बीमार ईल को जिसने हर काम आधे अधूरे ढंग से किया था कक्षा का सबसे उत्तम छात्र घोषित कर दिया गया । बोर्ड खुश था कि हर छात्र को बहुमुखी शिक्षा मिल रही थी। सही मायनों में बहुमुखी शिक्षा छात्रों को जिंदगी के लिए इस ढंग से तैयार करती है कि उनमें मौजूद किसी क्षेत्र विशेष से संबंधित योग्यता और क्षमता भी बरकरार रहे हैं कुल्हाड़ी की धार तेज करो 
जॉन नाम का एक लकड़हारा एक कंपनी में 5 साल से काम कर रहा था , पर उसे कभी तरक्की नहीं मिली। उसी कंपनी ने बिल नाम के एक और लकड़हारे को भी नौकरी पर रखा, और उसे साल भर में ही तरक्की मिल गई । जॉन ने बिल को एक साल के अंदर ही तरक्की दिए जाने का विरोध किया , और इस बारे में बात करने के लिए अपने बॉस के पास गया।  उसके बॉस ने जवाब दिया तुम अब भी उतने ही पेड़ काटते हो जितने कि 5 साल पहले काटते थे। हमारी कंपनी में नतीजे यानी result को देखा जाता है। अगर तुम अधिक पेड़ काटने लगो तो हमें तुम्हारा वेतन बढ़ाकर खुशी होगी। जॉन वापस लौट आया उसके बाद वह अधिक मेहनत से और ज्यादा देर तक पेड़ काटने लगा । इसके बावजूद वह ज्यादा पेड़ नहीं काट सका । उसने अपनी यह परेशानी बॉस को बताई । बॉस ने उसे बिल से बात करने का सुझाव दिया। उसने कहा शायद बिल को कुछ मालूम है , जो मैं और तुम नहीं जानते । जॉन ने बिल से पूछा कि वह ज्यादा पेड़ कैसे काट लेता है। दिल ने जवाब दिया , मैं हर पेड़ काटने के बाद 2 मिनट के लिए काम रोक देता हूं और अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज़ करता हूं । तुमने अपनी कुल्हाड़ी की धार आखरी बार कब तेज़ की थी। इस कहानी से सीख मिलती है कि पिछले शिक्षा और गौरव का महत्व नहीं होता। हमें अपनी कुल्हाड़ी की धार लगातार तेज करनी होगी।

सोने की तलाश में
 एंड्रयू कार्नेगी अपने बचपन के दिनों में ही स्कॉटलैंड से अमेरिका चले गए । उन्होंने छोटे-मोटे कामों से शुरुआत की, और आखिरकार अमेरिका में स्टील बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के मालिक बन गए। एक ऐसा वक्त आया जब उनके लिए 43 करोड़पति काम करते थे । करोड़ रुपए इस जमाने में भी बहुत होते हैं लेकिन सन् 1920 के आसपास तो उनकी बहुत ज्यादा कीमत थी । किसी ने कार्नेगी से पूछा , आप लोगों से कैसे पेश आते हैं? उन्होंने जवाब दिया  लोगों से पेश आना काफी हद तक सोने की खुदाई करने जैसा ही है । हमको एक तोला सोना खोद निकालने के लिए कई टन मिट्टी हटानी पड़ती है। लेकिन खुदाई करते वक्त हमारा ध्यान मिट्टी पर नहीं, बल्कि सोने पर रहता है। एंड्रयू कार्नेगी के जवाब में एक बहुत महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है । हो सकता है कि किसी इंसान या किसी हालत में कोई अच्छी बात साफ तौर पर ना दिखाई दे रही हो । ऐसीे हालात में हमें उसे गहराई में जाकर तलाशना होगा इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि अगर हम किसी इंसान या किसी चीज में कमियां ढूंढेंगे तो हमको ढेरों कमियां दिखाई देगी। लेकिन हमें किस चीज की तलाश है सोने की या मिट्टी की? कमियां ढूंढने वाले तो स्वर्ग में भी कमियां निकाल देंगे अधिकतर लोगों को वही मिलता है जिसकी उन्हें तलाश होती है
जरूरी नहीं है कि शिक्षित व्यक्ति सही फैसला करें । एक आदमी सड़क के किनारे समोसे बेचा करता था । अनपढ़ होने की वजह से वह अखबार नहीं पड़ता था। ऊंचा सुनने की वजह से रेडियो नहीं सुनता था ,और आंखें कमजोर होने की वजह से उसने कभी टेलीविजन भी नहीं देखा था । इसके बावजूद काफी समोसे बेच लेता था । उसकी बिक्री में लगातार बढ़ोतरी होती गई । उसने और ज्यादा आलू खरीदना शुरू किया, साथ ही पहले वाले चूल्हे से बड़ा और बढ़िया चूल्हा खरीद कर ले आया। उसका व्यापार लगातार बढ़ रहा था , तभी हाल ही में कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल कर चुका उसका बेटा पिता का हाथ बटाने के लिए चला आया । उसके बाद एक अजीबोगरीब घटना घटी । बेटे ने उस आदमी से पूछा पिताजी क्या आपको मालूम है कि हम लोग एक बड़ी मंदी का शिकार बनने वाले हैं  ? पिता ने जवाब दिया नहीं लेकिन मुझे उसके बारे में बताओ।  बेटे ने कहा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बड़ी गंभीर है। घरेलू हालात तो और भी बुरे हैं। हमें आने वाले बुरे हालात का सामना करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए । उस आदमी ने सोचा कि उसका बेटा कॉलेज जा चुका है अखबार पढ़ता है और रेडियो सुनता है इसलिए उसकी राय को हल्के ढंग से नहीं लेना चाहिए।  दूसरे दिन में उसने आलू की खरीद कम कर दी और अपना साइन बोर्ड नीचे उतार दिया । उसका जोश खत्म हो चुका था। जल्दी ही उसी दुकान पर आने वालों की तादाद घटने लगी और उसकी बिक्री तेजी से गिरने लगी । पिता ने अपने बेटे से कहा, तुम सही कह रहे थे । हम लोग मंदी के दौर से गुजर रहे हैं । मुझे खुशी हुई है की तुमने वक्त से पहले ही सचेत कर दिया।
 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है इससे यह नतीजे निकलते हैं हम अपनी सोच के मुताबिक खुद को आत्म संतुष्ट करने वाली भविष्यवाणियां कर देते हैं। दूसरा कई बार हम बुद्धिमता को अच्छा फैसला मानने की गलती भी कर बैठते हैं । तीसरा एक इंसान ज्यादा बुद्धिमान होने के बावजूद गलत फैसला कर सकता है । चौथा सलाहकार सावधानी से चुनिए लेकिन अमल अपने ही फैसले पर करिए । अगर किसी इंसान में ये गुण हैं तो वह सफल हो सकता है बिना स्कूली शिक्षा के 
चरित्र प्रतिबद्धता दृढ़ विश्वास साहस ।
बहुमुखी शिक्षा क्या है?
 एक जंगल में कुछ जानवरों में स्कूल शुरू करने का फैसला लिया। छात्रों में एक चिड़िया ,एक गिलहरी, एक मछली , एक कुत्ता, एक खरगोश और दिमागी तौर पर कमजोर इल मछली शामिल थी। पाठ्यक्रम तय करने के लिए एक बोर्ड बनाया गया। बोर्ड ने तय किया कि छात्रों को बहुमुखी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें उड़ना पेड़ पर चढ़ना तैरना और बिल खोदना सिखाया जाएगा । हर जानवर को सभी तालीम हासिल करने की पाबंदी थी । चिड़िया उड़ान भरने में माहिर थी उसने इस विषय में A ग्रेड हासिल किया लेकिन जब बिल खोदने की बारी आई तो वह अपनी चोंच और पंख तोड़ बैठी और असफल साबित होने लगी । इस नाकामयाबी का उस पर ऐसा असर पड़ा कि जल्द ही उसे उड़ान भरने में भी C ग्रेड मिलने लगा । पेड़ पर चढ़ने में और तैरने में तो वह फेल ही हो गई । गिलहरी पेड़ पर चढ़ने में काफी कुशल थी लेकिन वह तैरने में असफल हुई। मछली सबसे अच्छी तैराक थी लेकिन वह पानी के बाहर निकल ही नहीं सकती थी इसलिए बाकी सभी विषयों में फेल हो गई । कुत्ता स्कूल गया ही नहीं उसने फीस भी जमा नहीं की, और प्रबंधकों से इस बात को लेकर झगड़ा रहा कि पाठ्यक्रम में भोकना भी शामिल किया जाए। खरगोश को बिल खोदने में A ग्रेड मिला लेकिन उसके लिए पेड़ पर चढ़ना बहुत बड़ी समस्या थी वह बार-बार असफल होता रहा और एक दिन जमीन पर इस प्रकार बुरी तरह गिरा कि उसे ब्रेन डैमेज हो गया । वह बच तो गया लेकिन उसके दिमाग पर ऐसा असर पड़ा कि उसे बिल खोदने में भी दिक्कत होने लगी और उसे इस विषय में भी C ग्रेड मिलने लगा। आखिरकार दिमागी तौर पर बीमार ईल को जिसने हर काम आधे अधूरे ढंग से किया था कक्षा का सबसे उत्तम छात्र घोषित कर दिया गया । बोर्ड खुश था कि हर छात्र को बहुमुखी शिक्षा मिल रही थी। सही मायनों में बहुमुखी शिक्षा छात्रों को जिंदगी के लिए इस ढंग से तैयार करती है कि उनमें मौजूद किसी क्षेत्र विशेष से संबंधित योग्यता और क्षमता भी बरकरार रहे।
अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज करो 
जॉन नाम का एक लकड़हारा एक कंपनी में 5 साल से काम कर रहा था , पर उसे कभी तरक्की नहीं मिली। उसी कंपनी ने बिल नाम के एक और लकड़हारे को भी नौकरी पर रखा, और उसे साल भर में ही तरक्की मिल गई । जॉन ने बिल को एक साल के अंदर ही तरक्की दिए जाने का विरोध किया , और इस बारे में बात करने के लिए अपने बॉस के पास गया।  उसके बॉस ने जवाब दिया तुम अब भी उतने ही पेड़ काटते हो जितने कि 5 साल पहले काटते थे। हमारी कंपनी में नतीजे यानी result को देखा जाता है। अगर तुम अधिक पेड़ काटने लगो तो हमें तुम्हारा वेतन बढ़ाकर खुशी होगी। जॉन वापस लौट आया उसके बाद वह अधिक मेहनत से और ज्यादा देर तक पेड़ काटने लगा । इसके बावजूद वह ज्यादा पेड़ नहीं काट सका । उसने अपनी यह परेशानी बॉस को बताई । बॉस ने उसे बिल से बात करने का सुझाव दिया। उसने कहा शायद बिल को कुछ मालूम है , जो मैं और तुम नहीं जानते । जॉन ने बिल से पूछा कि वह ज्यादा पेड़ कैसे काट लेता है। दिल ने जवाब दिया , मैं हर पेड़ काटने के बाद 2 मिनट के लिए काम रोक देता हूं और अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज़ करता हूं । तुमने अपनी कुल्हाड़ी की धार आखरी बार कब तेज़ की थी। इस कहानी से सीख मिलती है कि पिछले शिक्षा और गौरव का महत्व नहीं होता। हमें अपनी कुल्हाड़ी की धार लगातार तेज करनी होगी।

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