मित्रो की होली 2023

मित्रो की होली

अमन और शाहजहां दो गहरे मित्र थे दोनों ही परिवारों को साथ-साथ सुख दुख के साथ रहते थे। शाहजहां हमेशा दिवाली की मिठाई लेकर अमन के घर पहुंचता था और ईद पर अमन सेवकों से शाहजहां का मुंह मीठा कर आता था। उन दोनों के परिवार में भी गहरी मित्रता थी। उनकी मित्रता की मिसाल है दूर-दूर तक दी जाती थी। दोनों ने साझेदारी में सुनार की दुकान खोली थी। उनका कारोबार बहुत प्रगति कर रहा था लेकिन ईश्र्याव कुछ लोगों ने उनकी इस मित्रता को तोड़ने की ठान ली। एक योजनाबद्ध तरीके से दुकान के अंदर चोरी करा दी गई और शाहजहां दोनों के पास ही यह खबर भिजवाई गई की चोरी में उन्हीं के संबंधी उनका हाथ है। अमन और शहजाद दोनों की बड़ी रकम दुकान में लगी हुई थी। चोरी हो जाने के कारण दोनों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई और उनमें एक दिन झगड़े होने लगे। चोरी का तो पता नहीं चला लेकिन उनकी मित्रता में  खटास जरूर आ गई। शहजाद का 15 साल का बेटा परवेज बहुत समझदार था। वह समझ गया कि उनके पिता और अमन अंकल के बीच में झगड़ा ईश्र्यालु लोगों ने कराया है। उसने भी उसने भी अमन के बेटे रमन के साथ एक योजना बनाई। होली करीब थी। होली के दिन परवेज अपने पिता से बोला, अब आज होली है, रंगो का त्यौहार। क्या आप अपने मित्र को होली की शुभकामनाएं देने और रंग लगाने नहीं जाएंगे। इस पर शहजाद चढ़कर बोला,"तुम्हें पता है ना कि उसने हमारे साथ बेईमानी की। दुकान में चोरी करवा कर भला बन गया। उसकी आर्थिक स्थिति तो ठीक हो गई है, लेकिन हम अभी तक दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रहे हैं।"परवेज बोला,"अब यही बात अमन अंकल भी तो आपके लिए सोच सकते हैं। जब चोरी के सामने नहीं आए चोरी हुए सामान का पता नहीं चला तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि अमन अंकल ने चोरी कराई है! वैसे भी अच्छे मित्र छोटी-छोटी बातों पर नहीं रूठा करते। जीवन में बहुत सारी बधाई आती हैं। उन बाधाओं को टकराकर जो मित्र एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं, वही साथ सच्चे मित्र होते हैं। होली का त्यौहार प्रेम मिलन और भाईचारे का त्यौहार है। अमन अंकल ने मित्रता की डोर मजबूत करने का आज से अच्छा अवसर नहीं मिलेगा। चलिए अब अंकल को होली के रंगों से सराबोर कर दीजिए और ईश्र्यालू लोगों को भाईचारे और अमन का संदेश दीजिए, जिन्होंने आप दोनों में शत्रुता का भाव उत्पन्न किए हैं।

           शहजाद अपने किशोर बेटे परवेज के गले लग गया और बोला,आमीन खुदा। मेरी बेटा बहुत समझदार निकला और मुझ नासमझ को होली के अवसर पर गहरी सीख दे गया। फिर वह अपनी आंखों को पूछते हुए अमन के घर की ओर चल पड़ा। अमन ने जब शहजाद को नम आंखों के साथ अपने घर की ओर आते हुए देखा तो उसकी आंखों में छलक पड़े। दोनों एक दूसरे को रंग लगाते हुए अत्यंत भावुक हो गए।

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