लोक अदालत

लोक अदालत (Lok Adalat) का अर्थ है 'लोगों की अदालत'। यह विवादों को आपसी समझौते से सुलझाने का एक वैकल्पिक माध्यम है। इसे गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित माना जाता है, जहाँ कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के बजाय बातचीत से मसलों को खत्म किया जाता है।
लोक अदालत के बारे में मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. यह कैसे काम करती है?
इसमें एक सेवानिवृत्त (Retired) न्यायाधीश, एक वकील और एक सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य के रूप में होते हैं।
यह सीधे तौर पर फैसला नहीं सुनाती, बल्कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता (Mediation) करवाकर समझौता कराती है।
2. किन मामलों का निपटारा होता है?
इसमें लगभग सभी दीवानी (Civil) और कुछ विशेष आपराधिक मामले सुलझाए जा सकते हैं, जैसे:
वैवाहिक और पारिवारिक विवाद।
जमीन-जायदाद के झगड़े।
बैंक लोन की रिकवरी या बिजली/पानी के बिल से जुड़े मामले।
मोटर दुर्घटना के क्लेम (MACT)।
चेक बाउंस के मामले।
3. इसके मुख्य फायदे
कोई अदालती शुल्क नहीं: इसमें केस लगाने के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं देनी पड़ती। यदि मामला पहले से कोर्ट में है और लोक अदालत में सुलझ जाता है, तो जमा की गई फीस वापस मिल जाती है।
समय की बचत: सालों तक चलने वाले मुकदमे एक ही दिन में खत्म हो सकते हैं।
अंतिम फैसला: लोक अदालत के फैसले को एक 'सिविल कोर्ट' की डिक्री माना जाता है। इसके फैसले के खिलाफ किसी अन्य अदालत में अपील नहीं की जा सकती, क्योंकि यह फैसला दोनों पक्षों की सहमति से होता है।
रिश्तों में सुधार: चूँकि यहाँ हार-जीत नहीं बल्कि समझौता होता है, इसलिए दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट खत्म होती है।

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