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27/10/2022
छठ पूजा
छठ पूजा क्या है?
छठ पूजा
यह एक हिन्दू
धर्म
के मुख्य
त्यौहार
है
छठ का अर्थ क्या होता है?
छठ का मतलब
होता
है सुबह
या सूर्य
का पूजा
उपासना
होता
है|
छठ पूजा
यह बिहार
का मुख्य
त्यौहार
है इसका
शुरुआती
से प्रश्न
उठता
है क्यों,
किसलिए,
कहाँ,
कैसे,
कब से और क्यों
मनाया
जाता
है इसके
बारें
में
लिखा
गया
है
छठ पूजा कब से किया जाता है?
यह प्राचीन
काल से ही मनाया
जा रहा
है इसका फिक्स
समय
पता(ज्ञात)
नही
है कहा
जाता
है की भगवान
राम से सबंधित
है|
छठ पूजा किसने शुरुआत किया?
इसका उतर
है सीता
माता
जब भगवान
राम
बनवास
से घर लौट
कर वापस
आया
तो सीता
माता
ने सूर्य
की उपासना
की थी उस व्रत
करने
से माँ
सीता
को सफलता
प्राप्त
हुआ
उसी
को देख
कर वहां
के लोग
व्रत
रखने
लगे
कहा
जाता
है की सूर्य
का व्रत
रखने
से मनोकामना पूरा होता
है|
यह हिन्दू धर्म में ही क्यों मनाया जाता है
छठ पूजा
ऐसे
में
हिन्दू
धर्मं
में
ही मनाया
जाता
है लेकिन
अपवाद
में
कई मुस्लिम,
बौद्ध
धर्म
के लोग
भी मनाया
करतें
हैं
छठ पूजा क्यों मनाया जाता है?
छठ पूजा
अधिकतर
महिला
लोग
करती
थी लेकिन
अब जनसँख्या बढ़कर महिला
और पुरुष
दोनों
कोई
मनाया
करता
हैं
छठ करने
का मुख्य
उदेश्य
है सूर्य
भगवान
से फल मांगने के लिए
छठ पूजा कैसे करतें हैं ?
छठ पूजा
करने को विधि इस प्रकार
है|
1
छठ पूजा
को करने
के लिए
सबसे
स्नान
कर खातें
है जिसका
भोजपुरी
अर्थ
है
‘नहान खान’ इस दिन
स्नान
कर अच्छे
से भोजन
करतें
हैं
2
दूसरा
दिन
अपने
अपने
गांवों
में
एक दुसरे
के घर भिक्षा
लिया
जाता
है जिससे
जो भी भिक्षा
के रूप
में
मिलता
है उसे
धो कर सुखाया
जाता
है और उसे
‘मिल’ में या गाँव
में
‘जाता’ (Machine) होता
है उससे
पिसवा
कर अगरौटा,
पुडी
बनाया
जाता
है|
दिन
भर भूखा
रहतें
हैं
और फिर
शाम
को मीठा
भोजन
या फल का सेवन
(खातें) करतें हैं
जिसमे
रसिआओ
, लौकी का सब्जी
बिना
नमक
को खाया
जाता
है शक्ति
तो यह है की जिस
पानी
से चावल
को धोया
जाता
उस पानी
को लाघने
पर भगवान
श्राप दे देतें
हैं
श्राप
लगनें
से शरीर
का रंग
सफ़ेद
रंग
का हो जाता
है
3 तीसरा दिन
पुरे
दिन
और रात
भूखा
रहते
हैं
शाम
को नदी
के घाट
पर रात
भर पूजा
करतें
हैं
पूजा
करने
के लिए
कई प्रकार
के फल होतें
जैसे
ईख,
अनानास,अमरुद,
शरीफा,
मुली,
नींबू
इत्यादि|
जबकि
ईख कोप्रमुख मानतें हैं
4
जहाँ
पूजा
होता
है उस घाट पर वहां
पूरा
साफ
सुथरा
किया
जाता
है
वहां पर रात
में
रात
भार
जग कर दिप
जलातें
हैं
वहां
पर बच्चो
ने दीप
को जलाकर
नदी
में
बहाते
हैं
5
सुबह
होतें
ही सभी
कोई
ब्रश
या दातुन
कर लेते
हैं
और सूर्य
को निकलते
ही अरघ
दिया
जाता
है अर्घ दिलाने
का तरीका
लोटा
में
दूध
लेकर
पंडित
जी सभी
के पूजा
वाला
सूप
या ढकनी
में
थोडा
थोडा
दूध
गिरातें
हैं
6
अर्घ
होने
के बाद
पूजा
स्थल
पर हवन
करतें
हैं
और नारियल
फोड़ते
है इसके
बाद
अपने
अपने
घर जातें
घर पर जाकर
कई रश्मे
की जाती
है
छठ करने से लाभ
हिन्दू धर्म
ग्रन्थ
के अनुसार
बहुत
अच्छे
माने
जातें
है छठ करना|
छठ अपने
पुत्र
प्राप्ति या सुख
सम्पन्ति के लिए
किया
जाता
है छठ पूजा
करने
से जूनून
होता
है किसी
भी लक्ष्य
प्राप्त
करने
के लिए
छठ करने से हानी
छठ करने
से कोई
नुकसान
नही
होता
हैं
सामान्य रूप
से शारीर
में
दर्द
पैदा
होता
है और सहानुभूति मिलती है
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