बदलाव


बदलाव पर अपने अपने विचार से लिखे कुछ कंटेंट जो आप बदलाव  के बारे में समझ सकतें हैं|

Poetry writing Saurabh Tiwari Marhatiya

प्रस्तुत है मेरी स्वरचित काव्य रचना

कविता का शीर्षक- बदलाव 

बदला न लें किसी से, अब बदल के स्वयं दिखाएँ हम।

अवगुण देखना छोड़कर अब सच्चे गुण अपनाएँ हम।

हम मानव बन प्रेम के सागर सबको प्रेम सिखाएँगे।

अपने कर्मों के द्वारा हम जगत को स्वर्ग बनाएँगे।

एकता का पाठ मिलकर अब औरों को भी सिखाएँ हम।

बदला न लें किसी से, अब बदल के स्वयं दिखाएँ हम।

हम सब बनकर ज्ञान के सूरज, दुनिया को चमका देंगे।

बनकर हम चंदा-सा शीतल, शीतलता बरसा देंगे।

सभी गुणों की झोली भरकर, सबको गुणवान बनाएँ हम।

अवगुण देखना छोड़कर अब सच्चे गुण अपनाएँ हम।

बदला न लें किसी से, अब बदल के स्वयं दिखाएँ हम।

आज की पीढ़ी के लिए हम एक बदलाव लाएंगे,

खुद को निर्णय लेने का संकल्प लेकर परिवर्तन कर जायेंगे।

इसी संकल्प के साथ अब आगे बढ़ते हुए हम।

बदले न लें किसी से, बदल के दिखाएं हम।


Ajay 

पत्थर से पानी बनाया हुआ देखा है मैंने,

इस दुनिया में लोगों के देखा है मैंने।

कब परिंदे सब नीचे से ऊपर उड़ गए,

इन सभी दस्तावेजों को मैंने देखा है।।

पल-पल में होते हैं दिन और रात की तरह बदलाव,

कई रातों को दिन में मैंने अनोखा देखा है।

रोशनी की एक किरण ही काफी है मेरे लिए,

घने अँधेरे को उजाले में मैंने अंधेरा देखा है।


ये सभी बदलाव स्वीकारे गए हैं,

चूँकि,बदलावों को स्वीकारने से जिंदगी को मजे से देखा है मैंने।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएँ ही इस कॉलम के अंतर्गत प्रकाशित होने के लिए पसंद करते हैं। हमारे इस प्रतिष्ठित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।



प्रतिभा नायक

प्रकृति हमें बताती है

बदलाव जरूरी है

अखंड का नाम जीव नहीं

रहना ज़रूरी है!!


डरबल सॉसन का सबल हो जाना

दिवालिये का खुलना जरूरी है

अँधेरी रात के बाद

नया सवेरा जरूरी है

प्रकृति हमें बताती है

बदलाव जरूरी है !


पर्वतों से लेकर वृक्षों तक, वृक्षों से लेकर वृक्षों तक

नदियों का बहते रहना जरूरी है

संघर्षों को अगर सह लिया गया

मंजिल का पता लगाना जरूरी है

प्रकृति हमें बताती है

बदलाव जरूरी है |


आग में कर तप

सोने का चमकना जरूरी है

अमावस की रात के बाद

पूनम का चाँद जरूरी है

प्रकृति हमें बताती है

बदलाव जरूरी है !


पांचों की सीमा हीन गगन में

हौसलों की उड़ान जरूरी है

मन में अगर ठान लिया

निडर होना जरूरी है

प्रकृति हमें बताती है

बदलाव जरूरी है

अखंड का नाम जीव नहीं

रहना जरूरी है||

                        -प्रतिभा नायक

 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएँ ही इस कॉलम के अंतर्गत प्रकाशित होने के लिए पसंद करते हैं। हमारे इस प्रतिष्ठित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।



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