Agriculture


कृषि भूगोल

कृषि
कृषि एक प्रमुख प्राथमिक क्रिया है जिस पर अधिकांश जनसंख्या आए हेतु निर्भर हैं कृषि के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की फसलों सब्जियां एवं फलों का उत्पादन किया जाता है यह उत्पाद उद्योगों हेतु कच्चे माल का कार्य करते हैं विभिन्न भौतिक रासायनिक तथा आर्थिक दिशाओं के आधार पर विभिन्न कृषि प्रणाली पाई जाती है जैसे के निर्वाह प्रणाली वाणिज्य पर कृषि मिश्रित प्रणाली सहकारी प्रणाली आदि।


निर्वाह अर्थव्यवस्था 
इस अर्थव्यवस्था में औद्योगिक विकास के साथ समानांतर रूप में कृषि का भी विकास होता है इसे विस्तृत निर्वाह अर्थव्यवस्था भी कहते है
क्योंकि यहां आत्मनिर्भर उत्पादन कम और जनसंख्या घनत्व भी काम होता है इस तरह के अर्थव्यवस्था वाले देशों में जैसे कि दक्षिण अफ्रीका अर्जेंटीना फिनलैंड आयरलैंड ऑस्ट्रेलिया स्पेन इटली इजराइल रूस यूक्रेन आदि देश आते हैं

अविक्षित अर्थव्यवस्था 
इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास का निम्न स्तर होता है इस प्रकार की अर्थव्यवस्था वाले देश में प्राकृतिक संसाधनों का अभाव होता है तथा यहां उद्योग व्यापार और आधुनिक प्रौद्योगिकी अधिक निम्न अवस्था में पाई जाती है यहां कृषि कृषि पर निर्भरता अधिक होती है इसे सगन निर्वाह अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है क्योंकि यहां आत्मनिर्भरता उच्च उत्पादन एवं जनसंख्या घनत्व अधिक होता है इस प्रकार की अर्थव्यवस्था वाले देशों में दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर संपूर्ण अफ्रीका का क्षेत्र कुछ दक्षिण अफ्रीका देश मध्य अमेरिका रूस जापान भारत तथा सिंगापुर को छोड़कर लगभग संपूर्ण एशिया के देश आते हैं


केंद्र नियोजित अर्थव्यवस्था सेंट्रली प्लेनेट इकोनॉमिक्स
इस तरह के अर्थव्यवस्था में उत्पादन की संसद साधनों पर संपूर्ण नियंत्रण सरकार का होता है देश का विकास में वृद्धि करने के लिए केंद्रीय क्षेत्र पर जोर दिया जाता है इस प्रकार के अर्थव्यवस्था वाले देश में चिन्ह युवा और उत्तर कोरिया आदि आते हैं

विश्व संसाधन एवं उनका वितरण
प्रत्येक वस्तु कुमार जिसका प्रयोग मानव द्वारा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता है संसाधन कहलाती है दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो ऐसा संसाधन एक प्रकार के प्राकृतिक तथा मानव कृत संप्रदाय है जिसका मानव अपनी इच्छाओं तथा आवश्यकता की पूर्ति हेतु उपयोग करता है विभिन्न वैज्ञानिक बोल बेटा और अर्थशास्त्री ने संसाधनों को अपने-अपने तरीके से अनेक रूप में परिभाषित करने की कोशिश की है जिनमें से कुछ परिभाषाएं इस प्रकार है

पी माखनाल के अनुसार प्राकृतिक संसाधन भी है जो प्राकृतिक द्वारा दिए गए हैं तथा जो मनुष्य हेतु उपयोगी है

ईडब्ल्यूएस मैनेजमेंट के अनुसार
प्रकृति की वे लक्षण जो मानव की आवश्यकता की पूर्ति करने की क्षमता रखते हैं तथा जिन्हें मानव ने अपने समर्थन इच्छाओं को द्वारा उपयोग के लिए बनाया है वह संसाधन कहलाते हैं

स्मिथ एवं फिलिप्स के अनुसार
मानव की सेवा में पर्यावरण की क्रियाशीलता ही संसाधन है
अगर यह सभी भूगोल बेटा के देखा जाए और अर्थशास्त्री को देखा जाए तो उसके उपयुक्त सभी परिभाषाओं को देखने पर यह स्पष्ट होता है कि जल वायु सूर्य प्रकाश मृदा वन भूमि वन्य प्राणी जलीय जीव खनिज शक्ति के संसाधन आदि मानव के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंमानव इनका अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए उपयोग करता है अतः इन्हें संसाधन कहा जाता है ओके मानव आर्थिक विकास के आदिम अवस्था के समय प्रकृति द्वारा प्रदान किए गए जीविका पाचन के साधनों जैसे वनस्पति और पशुओं पर ही निर्भर रहता है तथा लेकिन बदलते समय के साथ-साथ मानव ने आधुनिक तकनीक एवं प्रौद्योगिकी प्रौद्योगिकी का विकास किया और आर्थिक क्षेत्र में उन्नति की इसी परिपेक्ष में जीवन मां के कथन सटीक बैठता है कि संसाधन होते नहीं बल्कि बनाए जाते हैं यह जीवन मां का कहत था

किसी भी वस्तु या तत्व को संसाधन की परिभाषा के दायरे में आने वाले निम्नलिखित दशाएं पूर्ण करना आवश्यक है मतलब किस हम लोग संसाधन कर सकते हैं तो निम्न बिंदु से समझ सकते हैं
पहला पॉइंट किसी भी प्रकार की वस्तु या तत्व जिसका उपयोग संभव हो दूसरा बिंदु उसे वस्तु या तत्वों को रूपांतरित करके अधिक मूल्यवान वस्तु बनाई जा सके तीसरा पॉइंट है संसाधन का दोहन करने के लिए वस्तुओं का प्रयोग करने वाले व्यक्ति के पास प्राप्त रूप से वैज्ञानिक क्षमता एवं तकनीक ज्ञान होचौथा पॉइंट वस्तु का उपयोग एवं संसाधनों के दोहन के लिए प्राप्त मात्रा में पूंजी उपलब्ध होना जरूरी है इस प्रकार के संसाधनों के उपयोग से उपयोग से संबंधित भूगोल में दो प्रकार के मान्यता रही है प्रथम संसाधन पर्याप्त की संकल्पना उनके अनुसार विश्व में संसाधन प्राप्त मात्रा में भंडार है और मनुष्य की आवश्यकता की वृद्धि होने के साथ-साथ प्रकृति के रूप से तथा तकनीक विकास के संसाधनों के भंडार में भी विधि की जाती है इस मान्यता के समर्थ है अपनी संकल्पना की पुष्टि हेतु भविष्य के लिए सुरक्षित विशाल साइबेरिया भूमि या सक्रिय संसाधनों का उदाहरण देते हैं वहीं दूसरी मान्यता संसाधन संकट की संकल्पना है इसका समर्थन करने वाले भूगोल बेटा का मानना है कि विश्व संसाधन सीमित मात्रा में है एवं वर्तमान में विश्व जो संसाधन संकट के द्वारा से गुजर रहे हैं इन्होंने अपनी संकल्पना का पुष्टि के लिए समाप्त होते कोयला के भंडार एवं अन्य परंपरागत संसाधनों के उदाहरण दिए जैसे कि पेट्रोल कोयला इत्यादि प्रकार के संसाधन है
प्राकृतिक संसाधन
नींद को मिलती है प्राकृतिक रूप में प्राप्त हुए सभी संसाधन जो मनुष्य की आवश्यकता को पूरा करने में समर्थ हो उसे प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं जैसे कि वायु भूमि मृदा नदी जिले खनिज संसाधन। प्राकृतिक संसाधन विकास हेतु पदार्थ ऊर्जा और अनुकूल दशाएं प्रदान करते हैं इसे पर्यावरण का निर्माण होता है जिसमें मनुष्य तथा अन्य जीव रहते हैं वायु जल वन और विविध प्रकार की जीव मनुष्य के जीवन के लिए अनिवार्य है प्राकृतिक संसाधन संशोधित रूपों या बिना संशोधन दोनों ही प्रकार से प्रयुक्त होते हैं 

प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण
प्राकृतिक संसाधनों को विभिन्न वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है जिनका विवरण निम्नलिखित है
1जैव संसाधन
2अजावे संसाधन
 3तीसरा वास्तविक संसाधन 
4संभावित संसाधन 
5सर्व व्यापक संसाधन 
6स्थानिक संसाधन
7नवीकरणीय संसाधन

जैव संसाधन बायोटिक रिसोर्स 
संजीव संसाधनों को जैव संसाधन कहते हैं जैसे पौधे एवं जीव जंतु आदि यह जीव मंडल से प्राप्त होते हैं एवं  पुनःउत्पादन करने की क्षमता रखते हैं

अजय संसाधन एबायोटिक रिसोर्स
निर्जीव संसाधनों को अजावे संसाधन कहते हैं जैसे मृदा चट्टान एवं खनिज आदि संसाधन प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से संजीव संसाधनों को प्रभावित करते हैं

वास्तविक संसाधन ओरिजिनल रिसोर्स
वे संसाधन जिनकी मात्रा ज्ञात होती है उन्हे संसाधन कहते हैं वर्तमान में इन संसाधनों को उपयोग किया जा रहा है जैसे जर्मनी का रूर प्रदेश में कोयला पश्चिम एशिया में खनिज तेल आदि

संभावित संसाधन
वे संसाधन जिनकी संपूर्ण मात्रा ज्ञात नहीं हो सकती है उन्हें संभावित संसाधन कहते हैं वर्तमान में वर्तमान समय में इनका प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि भाभी से में किए जाने की संभावना रहती है जैसे भारत में भारत के लद्दाख में पाया गया यूरेनियम तथा बिहार में जमुई जिले में मिले स्वर्ण भंडार संभावित संसाधन की कक्षा उदाहरण है जिनका उपयोग भविष्य में किया जा सकता है बट अभी नहीं

सर्व व्यापक संसाधन
वे संसाधन जो सभी स्थानों पर तथा सभी के लिए उपलब्ध हो सर व्यापक संसाधन कहलाते हैं जैसे वायु प्रकाश आदि 

स्थानिक संसाधन 
 वे संसाधन जो सर्वे न होकर कुछ विशिष्ट तथा स्थान पर ही पाए जाते हैं जिनके स्थानिक संसाधन कहते हैं जैसे

 नवीकरणीय संसाधन वे संसाधन जो शीघ्रता से नवीकृत नवीकृत पुनः हो जाते हैं उन्हें नवीकरणीय संसाधन कहते हैं जैसे वायु जल मृदा वनस्पति तथा सौर ऊर्जा आदि

आण्विकरानी संसाधन
ऐसा संसाधन जिनका पुनः उपयोग निकट भविष्य में संभव नहीं होता है उन्हें आण्विकरण संसाधन कहते हैं इन्हें एक बार प्रयोग में लाने के बाद इसे इसे पुन निर्माण में करोड़ों वर्ष का समय लगता है इसके अंतर्गत खनिज पदार्थ पेट्रोलियम कोयला आदि को सम्मिलित किया जाता है


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