स्वतन्त्रता दिवस 15 अगस्त
15 अगस्त 1947 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है जब सदियों की गुलामी के बाद देश स्वतंत्र हुआ | उस दिन करोडो भारतीयो की आशये पूरी हुई | नृशंस के अंग्रेजो के अत्याचार से मुक्ति मिली | अहिंसा त्याग और करुना के देवता गांधी जी के नेतृत्व में हमने स्वतंतत्रता के दर्शन किए | वस्तुत: आजदी की यह लड़ाई खुले रूप से सन 1857 से ही शुरू हुई थी और कुल 90 वर्षो की कठोर साधाना महान राष्ट्र भक्तो के तप और बलिदान से अनगिनत कुर्बानियों से यह सपना एस दिन बोध हुआ एक नई स्फूर्ति की लहर मन प्राण को आन्दोलन करने लगी
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बलिदान की बात यद् आते ही हमारी आखे अश्रुपूर्ण को जाती है | इसी दिन स्वप्न लिए हमारे अनगिनत देशवासी फांसी के फंदे पर झूल गए | आजादी की कीमत चुकाने अनगिनत बहनों ने अपने भाइयो की क़ुरबानी की | मतयो ने अपने सपूतो को धधकती ज्वाला में झोका दिया | कितनो के सुहाग के सिंदूर धुल गए | भगत सिंह खुदीराम बोस जैसे अनेक नाम हैं जिनके बलिदान से इतिहास के पन्ने भरे पड़े हैं | गुलामी के बंधन टूटे पर इसके लिए अपने उपवन के उंदर फूलो की हमने कुर्बानी दी | देश आजाद अवश्य हुआ , पर इसके लिए दू:ख और आनाचार के काँटों और आग से भरी राह पर करने के पश्चात ही यह हमारे लिए गौरव की बात है की हमने यह आजादी अपने हक़ से पाई न की भीख मांग कर | 15 अगस्त को हमने त्याग और तपस्या के बल पर ही नहीं पाया बल्कि अंतराष्ट्रीय परिस्थिति ने हमें भरपूर सहयोग दिया | निस्संदेह हमारे हमारे पास शक्ति थी हम अवश्य होते पर सवतंत्र होने के लिए अधिक बलिदान देना पड़ता , समय व्ही अधिक लगता , स्वतंत्र पाने में 15 अगस्त का हमरे लिए अन्य कारणों से भी महत्त्व है | सवतंत्रता की लड़ाई मुट्टी भर व्यक्ति की लड़ाई नहीं होती किसी वर्ग सम्प्रदाय या जाती की लड़ाई नहीं होती | यह धर्म के नाम पर संकीर्ण सम्प्रदाय की भी लड़ाई नहीं ,देश में बसने वाली अनेक जातियों न साथ सार्थ मिलकर यह लड़ाई लड़ी | हिन्दू और मुस्लमान ,सिख और ईसाई एवं अन्य धर्मावलम्बियों ने कंधे से कन्धा मिलकर यह लड़ाई लड़ी | एकता में अत्तुत्शक्ति बसती है | एकता के विराट प्रदर्शन ने जन जन की लहराती हुई गंगा के वेग ने विरोध की चट्टानें तोड़ दी | किन्तु छल और षड्यंत्र के घिनौने भावो से भरे हुए अंग्रेजों ने गद्दी छोड़ते छोड़ते एक बहुत बड़ा घाव हमारे कलेजे पर दिया | अंग्रेजो की शोषण निति और ‘फुट करो ,राज्य करो’ की निति के चलते हमारे देश को दो टुकड़ो में बाट दिया| दीवारों के आर-पार दो दुनिया बन गई हिंदुस्तान और पाकिस्तान | होली या दशहरा के पवित्र त्यौहार की तरह ही यह भी राष्ट्रीय त्यौहार का एक मंगल दिवस है | बापू के आमोध अस्त्र सत्य और अहिंसा के भारतीय आदर्शो के बल पर लड़ी गई आजादी की लड़ाई में हमें अपूर्ण सफलता मिली | भारत के प्रत्येक शहर में पन्द्रह अगस्त आजादी की वर्ष गाट धूम-धाम से मनाई जाती है| स्कुल,कॉलेज, एवं सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा झंडा फहराया जाता है| यह तिरंगा झंडा शक्ति सादगी और समुन्नति का प्रतिक है| राष्ट ध्वज फहराया जाता है , राष्ट्रिय गीत की कडिया गयीं जाती है , नेतायो के भाषण होते हैं | लाल किला के प्राचीर से देश के प्रधान मंत्री का भाषण होता है | विभिन प्रकार की संस्कृतिक गोष्ठिया होती है| जगह – जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं | प्रत्येक वर्ष यह पवित्र तिथि आती है और हमें व्यापक प्रेरणा एवं सन्देश होती है ताकि हम चारो ओर फैली हुई अव्यवस्था के अन्धकार से देश को मुक्त करा सके | हममे से प्रत्येक का कर्तव्य हो जाता है की देश को खुशहाल करने के लिए आजादी की रक्षा और उसके विकाश के लिए हम अपने क्षुद्र स्वर्थ्यो से ऊपर उठे इस पुण्य तिथि को मानाने का सही तरीका यह है की इस दिन हम सत्य, अहिंसा , सेवा ,निस्वर्थ्य साधना अदि सद्गुणों को अपने आचारन में उतरने की प्रतिज्ञा लेमेरा वेबसाइट में आपको स्वागत है हमें follow करे
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