शायरी 1
सत्य और अहिंसा का
नित्य पाठ पढ़ाते बापू|
विपरीत परिस्थितियों
से कभी न घबराते बापू|
सबसे अधिक स्वाधीनता
आन्दोलन चलाते थे बापू|
हैं हर जनमानस के मन
में अमर सदा से बापू|
शायरी 2
है कोटिशत नमन हमरा
गाँधी जी चरणों में|
वे बसे रहंगे सदा हम
सबके स्मरणों में|
शायरी 3
राजघाट में उनकी समाधी
में लगा संगरमर|
देखो बापू हो गए अब
नोटों द्वारा अमर|
शायरी 4
तिन बन्दर थे बापू
के बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत बोलो|
हे देश के नैनिहालो इनसे
कुछ सीखो और अपनी आँखे खोलो|
शायरी 5
राष्ट्रपिता गाँधी
ने अपनी जिंदगी राष्ट्र भक्ति में ही गुजारी थी|
जाने कैसे गोडसे ने
बेचारे बापू को गोली मारी थी|
खुद हिन्दू होकर भी
जिसे प्रार्थना का ध्यान न था|
संभवत मति ही मारी
गई उसे वह ज्ञान न रखा|
शायरी 6
76 वर्ष जरुर है बीत
चुके भारतियों कि आजादी के
हम ऋणी रहेंगे सदा राष्ट्रपिता
महात्मा गाँधी को|
ऐसे ही नहीं अम्र
कहलाते हम सबके प्रिय बापू महान,
वीरगति को प्राप्त कर
जिन्होंने बढाया मातृभूमि का माना|
शायरी 7
भरत के धरती पर
जन्मे एक महापुरुष गाँधी जी|
सत्य व् अहिंसा के बल
पर जिन्होंने हमें दिलाई आजादी|
शायरी 8
हम सबका यह पुनित
कर्तव्य बापू के आदर्शो पर चलना|
मोदी जी निरंतर बता
रहे हैं उनकी मार्गो पर चलना|
भारत सरकार व्दारा
चलाया गया अभियान स्वाच्छ्ता चली है महात्मा गाँधी जी को सच्ची श्रव्धांजलि
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